हवाई जहाज की खिड़की में क्यों होता है छोटा-सा छेद, क्या आपको पता है इसके पीछे का फिजिक्स?
हवाई जहाज की खिड़कियों में छोटा-सा छेद होता है, जो विमान और यात्रियों की सुरक्षा में काफी अहम भूमिका निभाता है। ...और पढ़ें

क्या है प्लेन की खिड़की में बने छोटे से छेद का काम? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हवाई जहाज में विंडो सीट पर बैठकर बादलों के ऊपर से खूबसूरत नजारा देखना काफी अच्छा एक्सपीरिएंस होता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि हवाई जहाज की खिड़की के निचले हिस्से में एक बहुत छोटा-सा छेद होता है?
पहली नजर में यह छेद देखकर मन में सवाल उठ सकते हैं कि कहीं इससे हवा अंदर तो नहीं आ जाएगी या खिड़की टूट तो नहीं जाएगी? लेकिन हकीकत में, यह छोटा-सा छेद, जिसे ब्लीड होल या ब्रीदर होल कहा जाता है, आपकी सुरक्षा के लिए सबसे अहम इंजीनियरिंग फीचर्स में से एक है। आइए समझें कि कैसे एक छोटा-सा छेद प्लेन की सुरक्षा में भूमिका निभाता है।
हवाई जहाज की खिड़की की बनावट
हवाई जहाज की खिड़कियां कांच की नहीं, बल्कि एक्रिलिक की बनी होती हैं। एक खिड़की में आमतौर पर तीन परतें होती हैं-
- बाहरी परत- जो बाहर के मौसम और दबाव को झेलती है।
- मध्य परत- जिसमें वह छोटा सा छेद होता है।
- भीतरी परत- जो यात्री के सबसे करीब होती है और बाहरी परतों को खरोंच आदि से बचाती है।
केबिन के दबाव को कंट्रोल करना
जब जहाज 30,000 से 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ता है, तो बाहर हवा का दबाव बहुत कम हो जाता है, जबकि विमान के अंदर यात्रियों की सुविधा के लिए प्रेशराइज्ड केबिन होते हैं। इस कारण जहाज के अंदर और बाहर के दबाव में काफी अंतर होता है।
यह छोटा सा छेद मध्य परत और बाहरी परत के बीच के गैप में हवा के दबाव को बैलेंस करने का काम करता है। यह छेद केबिन की हवा को खिड़की की परतों के बीच जाने देता है, जिससे सारा दबाव केवल बाहरी परत पर पड़ता है। अगर किसी इमरजेंसी में बाहरी परत टूट भी जाए, तो मध्य परत दबाव को झेलने के लिए तैयार रहती है।
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कोहरे और पाले से बचाव
हजारों फीट की ऊंचाई पर तापमान काफी कम हो जाता है। ऐसे में खिड़कियों पर धुंध, कोहरा या बर्फ जमना स्वाभाविक है। अगर ऐसा हो, तो यात्री बाहर का नजारा नहीं देख पाएंगे।
ब्रीदर होल यहां एक डी-फॉगर की तरह काम करता है। यह छेद खिड़की की दो परतों के बीच नमी को जमा होने से रोकता है। इससे हवा का फ्लो बना रहता है और नमी बाहर निकलती रहती है, जिससे खिड़कियां साफ रहती हैं और आप सफर के दौरान खिड़की से साफ दिखाई देता है।
यात्री सुरक्षा के लिए
यह छोटा सा छेद विमान की स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी को बनाए रखने के लिए जरूरी है। यह तय करता है कि प्रेशर का सारा भार खिड़की की सबसे मजबूत बाहरी परत पर रहे। यह छोटी सी इंजीनियरिंग समझ यात्रियों को एक सुरक्षित उड़ान का अनुभव करवाती है।