भोपाल में किसान आंदोलन के बीच लुढ़कती बस को रोकने अड़कर खड़ी हो गईं एडीसीपी मोनिका, साहस की तस्वीर हुई वायरल
भोपाल में किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा धकेली जा रही अनियंत्रित बस को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका शुक्ला ने अपनी जान जोखिम में डालकर र ...और पढ़ें
HighLights
एडीसीपी मोनिका शुक्ला ने रोकी अनियंत्रित बस।
किसान आंदोलन के दौरान टला बड़ा हादसा।
उनकी बहादुरी की सोशल मीडिया पर चर्चा।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भोपाल में दो दिन चले किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा धक्का दिए जाने से सड़क पर अनियंत्रित हुई बस जब हादसे की ओर बढ़ने लगी तो अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एडीसीपी) मोनिका शुक्ला ढाल बनकर खड़ी हो गईं। वह बस को आगे बढ़ाने को धक्का दे रहे आंदोलनकारियों को रोकने के लिए अपनी जान पर खेल गईं।
आंदोलनकारी धकेल रहे थे बस
पीछे से आंदोलनकारी धक्का दे रहे थे और मोनिका अकेले ही आगे से उसे पीछे धक्का देने लगीं। इससे आंदोलनकारी ठिठक गए और पीछे हटने को विवश हुए। इस तरह एक महिला पुलिस अधिकारी ने अपनी हिम्मत और सूझबूझ से हादसा टाल दिया।
बस को धक्का देकर हटाने की कोशिश में बिगड़े हालात
दरअसल, किसानों का आंदोलन बुधवार शाम को उग्र हो गया था। मुख्यमंत्री आवास घेरने के लिए कूच कर रहे आंदोलनकारियों ने शहर के आरआरएल तिराहे पर पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए और रास्ता रोकने के लिए पुलिस द्वारा खड़ी की गईं बसों को धक्का देकर हटा दिया। इस बीच, जब आंदोलनकारी एक बस को धक्का देकर आगे बढ़ा रहे थे तो वह अनियंत्रित होकर आगे को लुढ़कने लगी। इससे दुर्घटना की आशंका बन गई।
अकेले बस के सामने खड़ी हुईं एडीसीपी
इस पर पुलिस कर्मियों द्वारा चीखकर समझाने के बाद भी आंदोलनकारियों ने बस को धक्का लगाने का क्रम नहीं रोका तो स्थिति को संभालने के लिए भोपाल जोन एक की अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका शुक्ला स्वयं बस के सामने जाकर खड़ी हो गईं, ताकि उन्हें ऐसा करते देख आंदोलनकारी किसान धक्का देना बंद कर दें।
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उन्होंने किसानों को रुकने और पीछे हटने को कहा, लेकिन प्रदर्शनकारी बस को धक्का लगाते हुए आगे बढ़ाते जा रहे थे। इस पर अपनी जान जोखिम में डाल मोनिका शुक्ला बस के सामने खड़ी होकर अकेले ही उसे पीछे ढकेलने की कोशिश करने लगीं। यह देखकर बस को अगल-बगल से धक्का दे रहे प्रदर्शनकारी किसान ठिठक गए। उन्होंने बस को छोड़ा और वहां से आगे बढ़ गए।
थाना प्रभारी ने हैंड ब्रेक खींचकर रोकी बस
इसी बीच, वहां मौजूद एक थाना प्रभारी ने बस का हैंडब्रेक लगाकर उसे रोक दिया। बस के रुकने तक कई किसान बस की छत पर चढ़े हुए थे। यदि बस को नहीं रोका जाता तो हादसे की स्थिति में उन्हें भी चोट आती। बाद में प्रदर्शनकारी वहां से हटकर मुख्यमंत्री निवास की ओर आगे बढ़ गए।
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सोशल मीडिया पर चर्चित हुआ घटनाक्रम
एडीसीपी मोनिका शुक्ला के बस के सामने खड़े होकर भीड़ को रोकने के प्रयास की चर्चा पूरे घटनाक्रम के दौरान होती रही। इंटरनेट मीडिया पर कई लोगों ने इसकी तुलना मुंबई में हुए नीट आंदोलन की उस चर्चित तस्वीर से की, जिसमें एक महिला आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर जा रहे पुलिस वाहन के सामने खड़ी नजर आई थी।
'यह मेरी सहज प्रतिक्रिया थी'
हालांकि एडीसीपी मोनिका शुक्ला का कहना है कि बस को धक्का दिया जाता देखकर उसे रोकने के लिए सहज प्रतिक्रिया में वह उसके सामने खड़ी हो गई थीं। उनकी कोशिश प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की थी।