बरगी क्रूज हादसा : तीन माह में देनी है रिपोर्ट, लेकिन न्यायिक जांच आयोग अब तक बेपटरी, न दफ्तर है... न संसाधन
बरगी क्रूज हादसे की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग एक हफ्ते बाद भी सक्रिय नहीं हो पाया है। आयोग के पास न कार्यालय है, न संसाधन और न ही कर्मचारी, जबकि उ ...और पढ़ें

बरगी में डूबा क्रूज (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बरगी डेम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को पखवाड़े से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग अब तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि आयोग की सेवा-शर्तों से लेकर कार्यालय, संसाधन और कर्मचारियों की व्यवस्था तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। जबकि आयोग को निर्धारित तीन माह की समय-सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।
एक हफ्ते पहले हुआ था न्यायिक आयोग का गठन
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने हादसे के दसवें दिन, 10 मई को न्यायिक जांच आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की थी। राज्यपाल के आदेश पर अपर सचिव दिनेश कुमार मौर्य के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में बताया गया था कि बरगी बांध में हुई क्रूज दुर्घटना और उससे हुई जनहानि की जांच के लिए जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा-3 के तहत हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग गठित किया गया है।
हालांकि आयोग के गठन की घोषणा के बाद भी उसकी कार्यप्रणाली को लेकर अब तक ठोस व्यवस्थाएं सामने नहीं आई हैं। न आयोग का कार्यालय तय हुआ है और न ही जांच के लिए आवश्यक स्टाफ एवं संसाधनों की औपचारिक व्यवस्था हो सकी है। इससे हादसे की निष्पक्ष और त्वरित जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इन बिंदुओं पर जांच
सरकार द्वारा आयोग को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें दुर्घटना के कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करना प्रमुख है। साथ ही हादसे के दौरान और बाद में किए गए बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा भी की जानी है।
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इसके अलावा आयोग को राज्य में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज और जलक्रीड़ा गतिविधियों का ऑडिट करने तथा इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 और एनडीएमए की बोट सेफ्टी गाइडलाइन-2017 के अनुरूप जलयानों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था पर सुझाव देने का दायित्व भी सौंपा गया है।
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आयोग को पूरे प्रदेश में क्रूज, नौकाओं और जलक्रीड़ा गतिविधियों के संचालन एवं रखरखाव के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने तथा ऐसे सभी स्थानों पर क्विक रिस्पांस टीम गठित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन करना है, जहां जल परिवहन या पर्यटन गतिविधियां संचालित हो रही हैं।