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    रनवे की ‘काली परत’ और हवाई सुरक्षा का राज : भोपाल एयरपोर्ट पर रात में चल रहा खास अभियान, हर दो माह में हटता है 12 किलो रबर

    Updated: Tue, 20 Jan 2026 02:52 PM (IST)

    भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए रात में एक विशेष अभियान चल रहा है। लैंडिंग के दौरान टायरों से रनवे पर ...और पढ़ें

    विमानों की सुरक्षित लैंडिग के लिए रनवे की साफ-सफाई कर रबर की परत हटाई जाती है।

    विमानों की सुरक्षित लैंडिग के लिए रनवे की साफ-सफाई कर रबर की परत हटाई जाती है।

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    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क. भोपाल। क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों फीट की ऊंचाई से जब कोई विशालकाय विमान जमीन पर लैंड करता है, तो वास्तव में रनवे पर क्या होता है? हम अक्सर सुरक्षित लैंडिंग पर तालियां बजाते हैं, लेकिन उस सुरक्षित लैंडिंग के पीछे एयरपोर्ट के रनवे पर एक 'काली परत' की कहानी छिपी है, जिसे अगर समय रहते साफ न किया जाए, तो यह किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

    चल रहा विशेष अभियान

    भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर इन दिनों रातों के सन्नाटे में एक विशेष अभियान चल रहा है। यह अभियान है रनवे की 'घिसाई और सफाई' का। दरअसल, विमानों की लैंडिंग के दौरान टायरों और रनवे के बीच जो घर्षण (रगड़) होता है, उससे वहां रबर जमा होने लगता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हर दो महीने में यह जमा हुआ रबर करीब 10 से 12 किलो तक हो जाता है।

    क्यों जमा होता है इतना रबर?

    एविएशन जानकार कहते हैं कि जब कोई विमान लैंड करता है, तो उस वक्त उसकी रफ़्तार 230 से 260 किमी प्रति घंटा तक होती है। इतने भारी-भरकम विमान का वजन और इतनी तेज गति जब जमीन से टकराती है, तो टायरों का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है। गर्मी इतनी ज्यादा होती है कि टायरों की सतह का कुछ हिस्सा पिघलकर रनवे पर ही चिपक जाता है। धीरे-धीरे यह रबर परत-दर-परत जमा होता रहता है।

    फिसलने का डर और बारिश का खतरा

    एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, रनवे पर जमा यह रबर सामान्य दिनों में तो खतरनाक है ही, लेकिन बारिश के मौसम में यह 'मौत का जाल' बन सकता है। जब रबर पर पानी पड़ता है, तो वहां फिसलन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में विमान के स्किड होने (फिसलने) और ब्रेक लगाने पर भी न रुकने का खतरा पैदा हो जाता है। ब्रेकिंग दूरी बढ़ जाने से विमान रनवे से बाहर भी जा सकता है।

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    रात के अंधेरे में हाई-प्रेशर तकनीक का कमाल

    चूंकि दिन में उड़ानों का आना-जाना लगा रहता है, इसलिए रबर हटाने का यह बेहद तकनीकी काम रात में किया जाता है। इसके लिए 'हाई प्रेशर वाटर जेट' तकनीक का इस्तेमाल होता है। आसान शब्दों में कहें तो पानी की इतनी तेज बौछार मारी जाती है कि रनवे की सतह को नुकसान पहुंचाए बिना, उस पर चिपका हुआ जिद्दी रबर उखड़ जाए। यह काम विशेष मशीनों और सफाई कर्मियों द्वारा पूरी सावधानी से किया जाता है।

    75 प्रतिशत घर्षण है जरूरी

    राजा भोज एयरपोर्ट के निदेशक रामजी अवस्थी के अनुसार, सुरक्षित लैंडिंग के लिए रनवे का घर्षण स्तर (फ्रिक्शन लेवल) कम से कम 0.75 होना अनिवार्य है। यह वह मानक है जो तय करता है कि तेज रफ्तार विमान सुरक्षित दूरी में रुक पाएगा या नहीं। यही कारण है कि डीजीसीए और एयरपोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया ने रनवे की नियमित जांच और सफाई को अनिवार्य कर रखा है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

    अगली बार जब आप लैंड करें, तो याद रखिएगा कि आपकी सुरक्षा के लिए रनवे की उस काली सड़क को भी नियमित रूप से 'नहलाया-धुलाया' जाता है।