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    भोपाल से खाड़ी देशों तक फैला गोमांस तस्करी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल कर बनाया 'सेफ कॉरिडोर'

    Updated: Mon, 19 Jan 2026 09:38 PM (IST)

    भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस में पकड़े गए 26 टन गोमांस मामले में अंतरराष्ट्रीय निर्यात गिरोह का खुलासा हुआ है। असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा कथित सरकारी स ...और पढ़ें

    गोमांस तस्करी के खुलासे के बाद स्लॉटर हाउस सील (फाइल फोटो)

    गोमांस तस्करी के खुलासे के बाद स्लॉटर हाउस सील (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल शहर के जिंसी स्थित स्लॉटर हाउस में पकड़े गए 26 टन गोमांस के मामले में अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। यह महज अवैध कटान का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय निर्यात गिरोह का हिस्सा है। जांच में सामने आया है कि असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा नगर निगम के कथित 'सरकारी संरक्षण' की आड़ में प्रतिबंधित गोमांस को बैंकॉक, दुबई सहित विभिन्न खाड़ी देशों (गल्फ कंट्रीज) तक पहुंचा रहा था, जहां की कंपनियों से उसने अनुबंध कर रखा था। इस पूरे खेल में अत्याधुनिक तकनीक, फर्जी दस्तावेज और समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल कर एक 'सेफ कारिडोर' तैयार किया गया था।

    ऐसे काम करता था गिरोह

    इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। जिंसी स्लॉटर हाउस में गोवंश के कटान के बाद उसे वैज्ञानिक तरीके से पैक किया जाता था। इस अवैध खेप को वैध बनाने के लिए पशु चिकित्सक के फर्जी या साठगांठ वाले प्रमाण-पत्रों का उपयोग किया जाता था। गोवंश के मांस को निगम के सरकारी पशु चिकित्सक डा. बीपी गौर ही कागजों पर भैंस का मांस घोषित करते थे। कस्टम और निर्यात संबंधी कागजी कार्रवाई में इसी फर्जी सर्टिफिकेट को आधार बनाकर जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकी जा रही थी।

    QR कोड और अत्याधुनिक पैकेजिंग का सहारा

    तस्करों ने इसे पूरी तरह 'कॉर्पोरेट' रंग दे दिया था। सूत्रों के अनुसार जब्त किए गए मांस की पैकेजिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाई गई है। प्रत्येक पैकेट पर विशेष QR कोड और टैग्स लगाए गए थे, ताकि विदेशी खरीदार को माल की पहचान करने में आसानी हो। वहीं, मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक वैक्यूम सीलिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता था, जिससे उसकी गंध बाहर न आए और वह महीनों तक खराब न हो।

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    मुंबई-चेन्नई के रास्ते तस्करी

    हिंदू संगठनों से जुड़े राजेश तिवारी ने बताया कि भोपाल से निकला यह अवैध मांस का कंटेनर सीधे मुंबई और चेन्नई के बंदरगाहों पर भेजा जाता था। तस्करों ने कई बार रेलवे पार्सल सेवा का भी दुरुपयोग किया। रेलवे के जरिये माल को सुरक्षित तरीके से पोर्ट तक पहुंचाया जाता था, जहां से इसे बड़े कंटेनरों में लोड कर खाड़ी देशों को निर्यात कर दिया जाता था। वहां के बाजारों में गोमांस की भारी मांग के कारण इसे ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।

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    हिंउस अध्यक्ष का दावा- हर सप्ताह दुबई जाता था असलम

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि हमने 17 दिसंबर को जो मांस पकड़ा था, वह कंटेनर के जरिये मुंबई जा रहा था, जहां से इसे विदेश सप्लाई किया जाना था। जब हमने पुलिस से मांस जब्त करने की बात कही तो उन्होंने हमसे कहा था कि ऐसा करने पर कंपनी आपसे मांस की कीमत की भरपाई करवा सकती है, जो कि 80 से 90 लाख रुपये है। हमने उनसे कहा कि जांच में यह गोमांस सिद्ध हुआ तो क्या किया जाएगा, जिसका पुलिस ने कोई उत्तर नहीं दिया और सैंपल लेकर कंटेनर को जाने दिया।

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    यह पूरा मांस पैकेट में बंद था। इस मामले में बड़े लोग शामिल हैं। असलम के संपर्क दुबई में भी हैं। वह हर सप्ताह जुआ खेलने के लिए दुबई जाता था, इसलिए न तो सीएम इस मामले में कुछ बोल रहे हैं और न ही पुलिस ने अभी तो असलम चमड़े को रिमांड पर लिया है।

    करीब पांच साल पहले भी असलम निजामुद्दीन एक्सप्रेस के जरिये मांस को दिल्ली भेज रहा था, तब भी हमने उसे रोका था। उसके भी सैंपल लिए गए थे, लेकिन आज तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। हमारी मांग है कि असलम एवं उसके सहयोगियों पर रासुका की कार्रवाई की जाए और उनके घर पर बुल्डोजर चलाया जाए।

    अभी जांच पुलिस के पास प्रक्रियाधीन है। हमने अभी किसी पर भी एफआइआर दर्ज नहीं कराई है। पुलिस की जांच के बाद जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई कराई जाएगी।
    - संस्कृति जैन, निगमायुक्त, भोपाल

    प्रकरण की विवेचना में अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि गोमांस कहां भेजा जा रहा था। आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया था। उन्हें दोबारा रिमांड पर लेकर भी विस्तृत पूछताछ होगी। फिलहाल मामले की जांच एसआइटी को सौंप दी गई है।
    - रश्मि अग्रवाल दुबे, एडिशनल डीसीपी जोन-1


    एडब्ल्यूबीआई ने मांगी रिपोर्ट, एफआईआर के दिए निर्देश

    नगर निगम के स्लॉटर हाउस में कथित तौर पर गायों की अवैध हत्या और कटान के मामले को लेकर अब केंद्रीय स्तर पर सख्ती बढ़ गई है। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अधीन कार्यरत एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। एडब्ल्यूबीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और स्लॉटर हाउस नियम 2001 सहित कई कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।

    बोर्ड ने दो टूक कहा कि जिन राज्यों में गोवंश वध पर प्रतिबंध है, वहां गायों का कटान पूरी तरह गैरकानूनी है। बोर्ड ने यह भी दोहराया कि गर्भवती, तीन माह से कम आयु के या पशु चिकित्सक से फिटनेस प्रमाण पत्र के बिना किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकता। एफएसएसएआइ की गाइडलाइन का हवाला देते हुए एडब्ल्यूबीआई ने जिम्मेदार अधिकारियों को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।