फर्जी डोमिसाइल से मेडिकल सीट हथियाने वाले डॉक्टर को तीन साल की कैद, 16 साल पुराने मामले में भोपाल कोर्ट का बड़ा फैसला
भोपाल अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे मेडिकल सीट हासिल करने वाले डॉ. सीताराम शर्मा को तीन साल के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा स ...और पढ़ें

डॉक्टर को सश्रम कारावास (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, भोपाल। फर्जी दस्तावेजों के सहारे मेडिकल सीट हासिल करने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक शासकीय डॉक्टर को सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने शुक्रवार को आरोपी डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
व्यापमं घोटाले से जुड़ी कड़ी
यह मामला बहुचर्चित व्यापमं घोटाले से जुड़ी कड़ियों में से एक है। आरोपी डॉ. सीताराम शर्मा वर्तमान में जिला भिंड के शासकीय चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ था।
आरोप था कि वर्ष 2009 में पीएमटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने राज्य कोटे का अवैध लाभ लेने के लिए मुरैना जिले की अंबाह तहसील का कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था।
यह भी पढ़ें- MP में अग्निवीर बनने को बेटियां भी दिन-रात बहा रहीं पसीना...सबसे ज्यादा भोपाल की महिला अभ्यर्थी
जांच में सामने आई सच्चाई
जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. सीताराम शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। उन्होंने अपनी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से की थी।
अंबाह तहसील के अभिलेखों की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि वहां से उनके नाम पर कभी कोई मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी ही नहीं हुआ था।
शिकायत के बाद खुला फर्जीवाड़ा
इस फर्जीवाड़े का खुलासा राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की शिकायत के बाद हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थी फर्जी दस्तावेजों के जरिए मध्य प्रदेश की मेडिकल सीटों पर कब्जा कर रहे हैं।
मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आकिल खान और सुधाविजय सिंह भदौरिया ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।