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    दतिया उपचुनाव का रण निर्णायक मोड़ पर, नरोत्तम व अवधेश समर्थकों पर टिकी निगाहें; गुरुवार को होगा मतदान

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 09:42 PM (IST)

    दतिया विधानसभा उपचुनाव का प्रचार थम गया है, अब भाजपा और कांग्रेस घर-घर संपर्क पर जोर दे रही हैं, 30 जुलाई को मतदान होगा। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भ ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में प्रचार का शोर थमने के साथ ही सियासी लड़ाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने मतदाताओं तक सीधे पहुंचने की रणनीति अपनाते हुए घर-घर संपर्क अभियान तेज कर दिया है। हाई-प्रोफाइल मानी जा रही इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    यह उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया जा रहा है। बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में अदालत द्वारा तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी।

    भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर

    दतिया सीट पर इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह संघ पृष्ठभूमि से जुड़े आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक और दतिया के पूर्व राजपरिवार से जुड़े घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव भी चुनाव मैदान में हैं, जिनकी मौजूदगी कुछ क्षेत्रों में मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।

    अब नजर स्थानीय समीकरणों पर

    प्रचार थमने के बाद अब दोनों दलों की नजर स्थानीय संगठन और प्रभावशाली नेताओं की सक्रियता पर टिक गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा में डॉ. नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस में अवधेश नायक के समर्थकों की भूमिका मतदान के दिन अहम साबित हो सकती है। यही स्थानीय समीकरण उपचुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

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    आशुतोष तिवारी: संगठन का भरोसा, पहचान की चुनौती

    भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संगठन से जुड़े रहे हैं। शिवराज सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था।

    मजबूती: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक और पार्टी संगठन ने व्यापक प्रचार कर उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा यह संदेश भी दे रही है कि सत्ता पक्ष का विधायक क्षेत्र के विकास को गति देगा।

    चुनौती: आशुतोष तिवारी का चेहरा विधानसभा क्षेत्र में अपेक्षाकृत नया है। वहीं अंतिम समय में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से कुछ समर्थकों की नाराजगी भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

    घनश्याम सिंह: अनुभव और स्थानीय पहचान दांव पर

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया और सेवढ़ा से कई बार विधायक रह चुके हैं। वे दतिया के पूर्व राजपरिवार से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में अच्छी पहचान रखते हैं।

    मजबूती: उनकी सहज और सौम्य छवि के साथ स्थानीय स्तर पर मजबूत जनसंपर्क कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। पार्टी को उम्मीद है कि भाजपा के असंतुष्ट वोटों का भी उसे लाभ मिल सकता है।

    चुनौती: कांग्रेस को आंतरिक गुटबाजी और संभावित भितरघात की चिंता बनी हुई है। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी की मौजूदगी और पूर्व राजपरिवार के कुछ सदस्यों की नाराजगी भी कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।

    2.20 लाख मतदाता करेंगे फैसला

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर कुल 2,20,410 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1,16,116 पुरुष, 1,04,284 महिला और 10 अन्य मतदाता शामिल हैं। पिछली बार इस सीट पर 79.26 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इस बार भी मतदान प्रतिशत और स्थानीय समीकरण ही जीत-हार तय करेंगे।