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    नरोत्तम का गढ़, तिवारी का टिकट और कांग्रेस की वापसी… दतिया में कैसे पलटा पूरा चुनावी खेल?

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 02:10 AM (IST)

    दतिया उपचुनाव में भाजपा को भितरघात का सामना करना पड़ा, क्योंकि नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से उनके समर्थक नाराज थे, जिससे कांग्रेस की जीत हुई। यह ज ...और पढ़ें

    डॉ. नरोत्तम मिश्रा, भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी व कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह।

    डॉ. नरोत्तम मिश्रा, भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी व कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह।

    HighLights

    1. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से भाजपा में भितरघात भारी पड़ा।

    2. कांग्रेस ने संगठनात्मक बदलाव व प्रभावी रणनीति से दतिया में जीत दर्ज की।

    3. दतिया उपचुनाव की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुई।

    राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भले ही एक सीट के कम या अधिक होने से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता हो, पर दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम की गूंज काफी दूर तक सुनाई देगी। यह केवल एक सीट मात्र पर हार का प्रश्न नहीं, बल्कि भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल था, क्योंकि पार्टी ने यहां प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा।

    टिकट नहीं दिए जाने से डा. मिश्रा के समर्थक आक्रोशित हुए। उनकी भावनाएं आहत हुईं, जो सड़क पर भी नजर आई। नरोत्तम मिश्रा तो प्रचार के लिए निकले, मगर समर्थक नहीं माने। भाजपा पर भितरघात भारी पड़ा। दतिया में फिर कांग्रेस की हुई। उसके नेताओं ने यहां जातिगत से लेकर स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर जो चुनावी रणनीति बनाई, वह सफल रही।

    नए चेहरे को उतारने से बिगड़े समीकरण

    भाजपा से नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को न्यायालय द्वारा आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में सजा सुनाए जाने के पहले से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। जब भारती की विधानसभा की सदस्यता समाप्त हुई तो नरोत्तम ने सामाजिक बैठकें प्रारंभ कर दीं। चुनाव की घोषणा होते ही इसमें और गति आ गई। नामांकन पत्र भी खरीद लिया, लेकिन पार्टी ने चौकाने वाला निर्णय करते हुए उनके स्थान पर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे दतिया विधानसभा क्षेत्र में जो माहौल बना वो अंत तक संभाले नहीं संभला।

    दिग्गजों की फौज भी नहीं बदल सकी जमीनी तस्वीर

    इसके लिए पार्टी नेतृत्व ने खूब प्रयास किए, लेकिन कार्यकर्ता मतदाताओं को घर से निकालकर मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचा पाए। जातिगत गणित को साधने के लिए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, ग्वालियर से लोकसभा सदस्य भारत सिंह कुशवाह, अरविंद भदौरिया सहित अन्य नेताओं को मैदान में उतारा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ लगभग 10 मंत्रियों ने प्रचार की कमान संभाली। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी पहुंचे। प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह पूरे समय मोर्चे पर रहे लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर नहीं कर पाए।

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    भारी पड़ा कार्यकर्ताओं का गुस्सा

    नरोत्तम मिश्रा ने आशुतोष तिवारी के साथ सभाएं करके संदेश देने का प्रयास किया कि हम साथ हैं, मगर कार्यकर्ताओं को जो करना था, वो पहले ही ठान चुके थे। यही कारण है कि मतदान का प्रतिशत घटा। महिला मतदाता घरों से बाहर कम निकलीं। उपचुनाव के परिणाम तो आए गए मगर बात यहीं खत्म होती नजर नहीं आ रही है। भितरघात की जो सूचनाएं पार्टी के पास हैं, उनका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।

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    कांग्रेस को मिली संजीवनी 

    दतिया उपचुनाव के परिणाम मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए संजीवनी से कम नहीं रहे। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पराजय का सामना करने के बाद से पार्टी स्वयं को खड़ा करने के प्रयास कर रही है। जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर पीढ़ी परिवर्तन का संदेश दिया गया।

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    संगठन को वरिष्ठ नेताओं की छत्रछाया से निकालने के लिए संगठन सृजन अभियान चलाया। जिला अध्यक्ष नेताओं की पसंद के स्थान पर कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर नियुक्त किए। केंद्रीय संगठन ने लगातार इनके कामकाज की निगरानी की। प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यक्रम चलाए। किसी की भी नाराजगी की परवाह किए बिना नए नेतृत्व को आगे बढ़ाया।

    प्रत्याशी चयन से लेकर बूथ तक बनाई रणनीति

    दतिया उपचुनाव की कमान पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा को सौंपी। मैदानी स्थिति का आकलन करने के लिए पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह को भेजा। प्रत्याशी चयन में सबकी राय को प्राथमिकता मिली। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती से संवाद किया। जब उन्होंने स्वास्थ्यगत कारण से मना कर दिया तो पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को प्रत्याशी बनाया। इससे टिकट के दावेदार अवधेश नायक थोड़े नाराज भी हुए मगर पार्टी नेताओं ने उन्हें मना लिया।

    दिग्गजों के साथ युवा नेताओं ने संभाला मोर्चा

    पार्टी के अनुभवी नेता दिग्विजय सिंह प्रचार के अंतिम दिन तक सक्रिय रहे। अजय सिंह, सचिन यादव, कमलेश्वर पटेल, पंकज उपाध्याय, सतीश सिकरवार, दिनेश गुर्जर, पीसी शर्मा से लेकर प्रदेश व जिला पदाधिकारी मैदान में डटे रहे, जिसका कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश गया। भितरघात भी हुआ और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर किसी और ने नहीं घनश्याम सिंह ने ही आरोप लगाए। इस पर उनकी प्राथमिक सदस्यता भी निलंबित कर दी।

    पार्टी पदाधिकारियों का कहना है तो परिणाम आया है, वह कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने वाला है और इसका लाभ मई-जून 2027 में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव के साथ मिशन 2028 ( प्रस्तावित विधानसभा चुनाव) की तैयारी में मिलेगा।