फर्जी IPS बनकर UPSC अभ्यर्थियों को दिखाया सरकारी नौकरी का सपना, 8 लाख ठगे; नकली नियुक्ति पत्र से खुला फर्जीवाड़ा
आरोपित ने खुद को 2016 बैच का आईपीएस और इनकम टैक्स की इंटेलिजेंस टीम का अधिकारी बताकर जमाया रौब। फर्जी ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र। (इनसेट में- आरोपित ऋषि यादव)
HighLights
जालसाज ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर ठगा।
छह यूपीएससी अभ्यर्थियों से आठ लाख रुपये ऐंठे।
फर्जी नियुक्ति पत्र की गलतियों से हुआ खुलासा।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल में सरकारी नौकरी के नाम पर यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं से ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक जालसाज ने खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी और इनकम टैक्स विभाग में प्रतिनियुक्ति पर असिस्टेंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताकर छह युवाओं को नौकरी का झांसा दिया और करीब आठ लाख रुपये ऐंठ लिए।
युवाओं का भरोसा जीतने के लिए आरोपित ने बाकायदा फर्जी सरकारी आईडी कार्ड बनाया और खुद को प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पेश किया। इतना ही नहीं, रकम लेने के बाद देवांशु समेत तीन युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेज दिए। लेकिन यही नियुक्ति पत्र उसके झूठ का सबसे बड़ा सबूत बन गया। पत्र में इनकम टैक्स कार्यालय का पता गलत था और कई शब्दों की स्पेलिंग भी गलत लिखी गई थी। युवाओं ने जब दस्तावेज की पड़ताल की तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।
शिकायत के बाद एमपी नगर पुलिस ने आरोपित ऋषि कुमार यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
अन्नपूर्णा कैफे में हुई थी मुलाकात
एमपी नगर पुलिस के एसआई शिवराज सिंह के मुताबिक, 38 वर्षीय ऋषि कुमार यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी के शक्तिनगर क्षेत्र का रहने वाला है। वह करीब चार महीने से भोपाल के एमपी नगर स्थित मीरा कॉम्प्लेक्स में किराये के मकान में रह रहा था। ऋषि ने झांसी यूनिवर्सिटी से एमटेक किया है और फिलहाल बेरोजगार था।
अप्रैल 2026 में जोन-2 स्थित अन्नपूर्णा कैफे में उसकी मुलाकात राजगढ़ निवासी देवांशु वर्मा से हुई। देवांशु भोपाल में कोचिंग लेकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। उस समय उसके साथ ध्रुव चौहान, पीयूष जसवाल, राजकुमार, महक शर्मा सहित कुछ अन्य दोस्त भी मौजूद थे।
एक लाख रुपये में नौकरी का झांसा
ऋषि ने देवांशु और उसके दोस्तों को बताया कि वह इनकम टैक्स विभाग की इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट टीम में उनकी नौकरी लगवा सकता है। उसने प्रत्येक युवक से एक लाख रुपये मांगे। सरकारी नौकरी की उम्मीद में छह युवाओं ने उसे अलग-अलग किश्तों में रकम दे दी।
आरोपित युवाओं को भरोसा दिलाता था कि नौकरी के शुरुआती प्रोबेशन पीरियड में 25 हजार रुपये वेतन मिलेगा और 11 महीने बाद नौकरी स्थायी होने पर वेतन बढ़कर 72 हजार रुपये हो जाएगा। वह सभी को इन्वेस्टिगेशन टीम में पदस्थ कराने का दावा करता था।
जब किसी युवक के पास पैसे कम पड़ते तो ऋषि उसे लोन लेने तक की सलाह देता था। वह कहता था कि नौकरी लगने के बाद वेतन से आसानी से लोन की किश्त चुकाई जा सकेगी।
घूमने-फिरने और खर्च के नाम पर भी वसूले पैसे
नौकरी के नाम पर एक लाख रुपये लेने के अलावा ऋषि ने करीब दो महीने तक युवाओं से अलग-अलग बहाने से रकम वसूली। कभी अपने खर्च, कभी घूमने-फिरने, आने-जाने और खाने-पीने के नाम पर वह दो से पांच हजार रुपये तक मांगता रहा। इस तरह आरोपित के पास करीब आठ लाख रुपये पहुंच गए।

पत्नी को भी बताया आईपीएस अधिकारी
युवाओं का विश्वास पूरी तरह जीतने के लिए ऋषि ने अपने परिवार को लेकर भी झूठी कहानी गढ़ी। वह दावा करता था कि उसकी पत्नी दिल्ली के आबकारी विभाग में आईपीएस अधिकारी है, जबकि पुलिस जांच में उसकी पत्नी के गृहणी होने की बात सामने आई।
हालांकि, उसका भाई बिजली विभाग में कार्यरत बताया गया है और पिता झांसी बीएचईएल से सेवानिवृत्त हैं। परिवार की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल भी वह युवाओं के बीच अपना प्रभाव जमाने के लिए करता था।
मोबाइल पर तैयार किया फर्जी आईडी कार्ड
पुलिस पूछताछ में ऋषि ने बताया कि उसने मोबाइल और एमएस ऑफिस की मदद से फर्जी सरकारी आईडी कार्ड तैयार किया था। इसके लिए उसने इंटरनेट से एक पुराना कार्ड लिया और उसमें अपना नाम और फोटो एडिट कर दिया।
इसी तरह उसने फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी तैयार किया। जुलाई में उसने देवांशु समेत तीन युवाओं को ये नियुक्ति पत्र भेजे। लेकिन पत्र की जांच में इनकम टैक्स कार्यालय का गलत पता और कई शब्दों की गलत स्पेलिंग देखकर युवाओं को शक हुआ।
न नौकरी मिली, न पैसे लौटे
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी जब युवाओं की नौकरी नहीं लगी और रकम वापस मांगने पर भी उन्हें पैसे नहीं मिले, तो उन्होंने दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस में शिकायत की गई।
एमपी नगर पुलिस ने जांच के बाद ऋषि कुमार यादव को एमपी नगर क्षेत्र से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपित ने इसी तरीके से और कितने लोगों को निशाना बनाया है और उसके साथ इस ठगी में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
नियुक्ति पत्र में ये गलतियां, यहीं से खुला पूरा फर्जीवाड़ा
आरोपित ने खुद को आईपीएस बताया था। उसने यूं तो झांसी यूनिवर्सिटी से एमटेक किया था, लेकिन उसके बनाए नियुक्ति पत्र में ऐसी गलतियां थीं, जिन्हें यूपीएससी अभ्यर्थियों ने तुरंत पकड़ लिया।
- इनकम टैक्स ऑफिस के पते में मयूर भवन की जगह मयूर विहार लिखा।
- कनॉट पैलेस की स्पेलिंग गलत लिखी।
- प्रिविलेज की स्पेलिंग गलत थी।
- आफर्ड शब्द गलत लिखा गया।
- छत्तीसगढ़ की स्पेलिंग तक गलत लिखी गई।
नियुक्ति पत्र में एक के बाद एक गलतियां देखकर युवाओं ने इसकी पड़ताल की। इसके साथ ही फर्जी आईपीएस की नौकरी और आठ लाख रुपये की ठगी का पूरा खेल सामने आ गया।
जालसाज ने नौकरी के नाम पर छह युवाओं से ठगी की थी और करीब आठ लाख रुपये ऐंठ लिए थे। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसका कोई पुराना रिकार्ड नहीं मिला है।
- जयहिंद शर्मा, एमपीनगर थाना प्रभारी
