कर्नल सोफिया मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ नहीं चलेगा मुकदमा, राज्यपाल ने दी हरी झंडी
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी मामले में बड़ी राहत मिली है। राज्यपाल मंगुभाई ...और पढ़ें

मंत्री विजय शाह व कर्नल सोफिया कुरैशी। (फाइल फोटो)
HighLights
मंत्री विजय शाह को कर्नल सोफिया मामले में राहत मिली।
राज्यपाल ने अभियोजन की अनुमति न देने की अनुशंसा मानी।
एसआईटी ने मांगी थी राज्य सरकार से अभियोजन की मंजूरी।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के पराक्रम की जानकारी देशवासियों तक पहुंचाने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश शासन के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने उनके विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति न देने संबंधी अनुशंसा को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने हरी झंडी दे दी है।
25 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अभियोजन की अनुमति न देने की अनुशंसा राज्यपाल से करने का निर्णय लेकर प्रस्ताव भेजा गया था।
पिछले साल महू में की थी विवादित टिप्पणी
गौरतलब है कि मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतारकर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।
एसआईटी ने सौंपी सीलबंद रिपोर्ट
उनकी इस टिप्पणी का हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर प्राथमिकी के निर्देश दिए। आगे मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ। एसआईटी ने जांच करके सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी और विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति मांगी, जो लंबित रही।
कैबिनेट ने पिछले हफ्ते भेजा था प्रस्ताव
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को शीघ्र निर्णय करने के निर्देश दिए। 31 अगस्त को सुनवाई से पहले 25 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में राज्यपाल से मुकदमा न चलाने संबंधी अनुशंसा का निर्णय लेकर प्रस्ताव भेजा गया। इसे राज्यपाल ने हरी झंडी देकर फाइल लौटा दी। अब यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
यह बनाया था आधार
कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों ने एक स्वर में कहा था विजय शाह इस मामले में सार्वजनिक मंचों और लिखित रूप में चार बार माफी मांग चुके हैं। उनकी मंशा सेना या महिला अधिकारी का अपमान करने की कतई नहीं थी, इसलिए अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं बनता है। इस आधार पर विधिक सलाह लेकर राज्यपाल से अनुशंसा की गई, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।
