MP Assembly Session: भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी पर सदन में डेढ़ घंटे तीखी बहस, कांग्रेस ने किया हंगामा, बहिर्गमन
मप्र विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों पर बहस हुई। कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया। ...और पढ़ें

सदन से वॉकआउट करने के बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए।

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा छाया रहा। करीब डेढ़ घंटे चली चर्चा के दौरान कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार को घेरा। सरकार ने सदन में भागीरथपुरा में 32 लोगों की मौत होना स्वीकार किया, जिसके बाद विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वॉकआउट कर दिया और सदन के बाहर प्रदर्शन किया।
विपक्ष बोला- यह सरकार पर भरोसे की मौत
कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह के सवाल के जवाब में सरकार ने मौतों का आंकड़ा स्वीकार किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे “भरोसे की मौत” बताते हुए कहा कि यह हादसा जनता के उस विश्वास को तोड़ता है, जो वह सरकार और प्रशासन पर करती है। उन्होंने 2019 में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें इंदौर के 60 में से 59 पानी के नमूने फेल पाए गए थे। सिंघार का आरोप था कि इतनी गंभीर रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए।
ऐसा कमजोर महापौर, जिसकी बात अधिकारी नहीं सुनते
कांग्रेस नेता सचिन यादव ने इंदौर की महापौर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर को ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसकी बात अधिकारी तक नहीं सुनते। विपक्ष ने भागीरथपुरा मामले पर स्थगन प्रस्ताव की मांग की, जिसे अध्यक्ष ने आगामी चर्चा के लिए स्वीकार नहीं किया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सदन में हंगामा किया।
इस बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रही है। अधिकारियों के साथ समन्वय में कार्ययोजना तैयार की गई है और दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंदौरवासी स्वाभिमानी हैं, वे गिरकर फिर उठना जानते हैं और घावों का प्रदर्शन नहीं करते।
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‘औकात’ संबंधी बयान पर विवाद गहराया
वहीं, गुरुवार को सदन में हुई बहस के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को “औकात में रहो” कहे जाने पर विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज का अपमान बताते हुए मुद्दा बनाया है। शुक्रवार को विधानसभा पहुंचते ही सिंघार ने सवाल उठाया कि मंत्री ऐसे शब्दों का प्रयोग किसके लिए और क्यों कर रहे हैं।
विवाद के बाद भोपाल स्थित मंत्री विजयवर्गीय के निवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
गौरतलब है कि गुरुवार को सदन में भागीरथपुरा के साथ ही अदाणी समूह और सरकार के बीच हुए बिजली समझौते पर भी पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस हुई थी, जिसके चलते कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। फिलहाल भागीरथपुरा का मुद्दा सियासी केंद्र में बना हुआ है।