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    MP में 'स्वागत द्वार' बनाने पर रोक, फिजूलखर्ची रोकने के लिए नगरीय निकायों को सख्त निर्देश

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 06:03 PM (GMT+05:30)

    मध्य प्रदेश में नगरीय विकास विभाग ने स्वागत द्वार बनाने पर रोक लगा दी है। नगरीय निकायों के सीएमओ को अपर मुख्य सचिव ने दी हिदायत- किसी ने स्वागत द्वार ...और पढ़ें

    स्वागत द्वार (प्रतीकात्मक चित्र)

    स्वागत द्वार (प्रतीकात्मक चित्र)

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    राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब नगर निगम व नगरीय निकाय स्वागत द्वार नहीं बनाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने नगरीय निकायों के सीएमओ को मौखिक हिदायत दी है कि अब किसी ने स्वागत द्वार बनाया तो संस्पेंड कर दूंगा। इसी के साथ उन्होंने शहरी क्षेत्रों में स्वागत द्वार बनाने पर रोक लगा दी है। यह निर्णय फिजूलखर्ची रोकने और निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है।

    बुनियादी सुविधाओं पर होगा फोकस

    विभाग का तर्क है कि नगर निगमों व निकायों की माली हालत ठीक नहीं है। इससे उबरने के बजाय निकाय ऐसे निर्माण कार्य कर रहे हैं, जिनसे कोई आय नहीं होती है। इनमें स्वागत द्वार को फिजूलखर्ची का कार्य बताया गया है। विभाग ने निकायों को स्वागत द्वार बनाने के बजाय बुनियादी सुविधाओं, जैसे- सड़कों, नालियों और शुद्ध पेयजल आपूर्ति जैसी नागरिक सुविधाओं के विकास पर खर्च करने का निर्देश दिया है।

    लाखों से करोड़ तक का खर्च

    नगरीय निकाय के अधिकारियों की माने तो नगर पालिका या प्रमुख सड़कों पर बनने वाले कांक्रीट और पत्थर के मध्यम आकार के स्वागत द्वारों पर लगभग 15 लाख से 20 लाख तक का खर्च होता है। स्वागत द्वार में रेड सैंडस्टोन (लाल पत्थर) या अन्य नक्काशीदार पत्थर का उपयोग लागत बढ़ाता है। लोहे या साधारण कांक्रीट से बने छोटे से छोटे स्वागत द्वार की लागत भी पांच लाख से 15 लाख रुपये तक आती है। इस राशि के व्यय से निकायों को आय नहीं होती। बड़े आकार के स्वागत द्वार बनाने में एक करोड़ से अधिक राशि व्यय होती है।

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    भोपाल सहित कई शहरों में बनाए जा रहे स्वागत द्वार

    • शाजापुर शहर में नगर पालिका द्वारा उज्जैन के महामृत्युंजय द्वार की तर्ज पर 2.90 करोड़ रुपये से एक भव्य स्वागत द्वार का निर्माण किया जा रहा है।
    • भोपाल में फंदा के पास सिक्स लेन सड़क पर पांच करोड़ की लागत से 30 मीटर चौड़ा सम्राट विक्रमादित्य द्वार बनाया जा रहा है।
    • उज्जैन की साईंधाम कालोनी, राजेंद्र नगर, केशव नगर आदि 35 स्थानों पर 6.28 लाख रुपये से स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं।
    • खरगोन जिले के महेश्वर में मंडलेश्वर मार्ग पर नगर से एक किमी दूर पर विशाल अहिल्या स्वागत द्वार बनाया गया है।
    • नगर पालिका स्तर के प्रोजेक्ट्स में मप्र के विभिन्न जिलों जैसे देवास और विदिशा में भी स्थानीय निकायों द्वारा 10 लाख से 20 लाख की लागत वाले छोटे स्वागत द्वारों के टेंडर जारी किए गए हैं।

    सियासत बनाम सख्ती

    एक ओर जहां विभाग इस फैसले को वित्तीय अनुशासन की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा महापुरुषों के नाम पर प्रवेश द्वार बनाने की मांग लगातार उठती रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा है कि महापुरुषों के नाम पर शहरों के प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। ऐसे में आने वाले समय में इस फैसले पर सियासी बहस तेज होने के आसार हैं।

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