मध्य प्रदेश में जल्द होंगे सहकारी और कृषि मंडी चुनाव, सीएम मोहन यादव ने दी हरी झंडी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में सहकारी समितियों और कृषि उपज मंडियों के चुनाव कराने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। भारतीय किसान संघ की मांग ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
वैभव श्रीधर, भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें कृषि को लाभकारी बनाने के लिए कई कदम उठाने के साथ किसानों से जुड़ी संस्थाओं के चुनाव भी कराए जाएंगे। भारतीय किसान संघ द्वारा सहकारी और कृषि उपज मंडियों के चुनाव कराने की मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सैद्धांतिक सहमति देते हुए चरणबद्ध तरीके से चुनाव कराने के संकेत दिए हैं।
2013 के बाद नहीं हुए चुनाव
प्रदेश में 4500 प्राथमिक सहकारी समितियां, 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, राज्य शीर्ष सहकारी बैंक और 267 कृषि उपज मंडियां हैं। कृषि उपज मंडियों के चुनाव वर्ष 2012 और सहकारी समितियों के चुनाव वर्ष 2013 के बाद नहीं हुए। कभी विधानसभा-लोकसभा चुनाव तो कभी कर्जमाफी और कभी कोरोना महामारी के कारण ये टलते रहे। जबकि, कार्यकाल पूरा होने से छह माह पहले चुनाव कराने का प्रविधान है।
हाई कोर्ट भी इस संबंध में सरकार को दिशा-निर्देश दे चुका है। अवमानना से बचने के लिए सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने कार्यक्रम भी घोषित कर दिया था, लेकिन भारत सरकार के समिति का पुनर्निर्धारण कर प्रत्येक पंचायत स्तर पर एक समिति गठित करने के दिशानिर्देश के कारण मामला फिर अटक गया।
स्थानीय निकाय चुनाव से पहले होगा प्रदेश में माहौल का आकलन
सहकारी और मंडी समितियों से एक करोड़ से अधिक किसान जुड़े हैं। वैसे तो ये चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हैं लेकिन प्रत्याशी चयन से लेकर अन्य गतिविधियों में राजनीतिक दलों का पूरा दखल रहता है। इसके माध्यम से जहां भाजपा और कांग्रेस को अपनी मैदानी तैयारी पता चलेगी तो ग्रामीणों का रुझान भी सामने आ जाएगा, जो आगामी तैयारी का आधार बनेगा।
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प्रदेश में वर्ष 2027 से चुनाव का क्रम प्रारंभ हो जाएगा। पहले नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव होंगे, जो दलीय आधार पर होते हैं। इसके बाद ग्राम, जनपद और जिला पंचायत के चुनाव होंगे। ये गैर दलीय आधार पर होते हैं।
मंत्रियों-अधिकारियों को दिए जा चुके हैं निर्देश
कृषक कल्याण वर्ष में फसल चक्र परिवर्तन, व्यावसायिक फसलों के उत्पादन को बढ़ावा, पशुपालन से लेकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां संचालित होंगी। कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। वर्षभर चलने वाली इन गतिविधियों से जो माहौल बनेगा, उसका लाभ सरकार सहकारी और मंडी समितियों के चुनाव में उठाने की तैयारी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विभागीय समीक्षाओं के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों को चुनावों की तैयारी करने के निर्देश भी दे चुके हैं।
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प्रशासकों के जिम्मे समितियां
सहकारी अधिनियम में प्रत्येक पांच वर्ष में चुनाव कराने का प्रविधान है लेकिन किसी कारण से चुनाव नहीं हो पाते हैं तो छह-छह माह करके अधिकतम एक वर्ष के लिए प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है लेकिन यह व्यवस्था वर्ष 2018 से चली आ रही है। इस बीच अधिनियम में यह भी प्रविधान कर दिया कि विशेष परिस्थिति में चुनाव कराने संबंधी प्रविधान को शिथिल भी किया जा सकता है।
इसे ही आधार बनाकर हाई कोर्ट जबलपुर में सरकार ने जवाब दिया कि अभी समितियों का पुनर्गठन किया जा रहा है, जैसे ही यह पूरा हो जाएगा चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में लगभग 700 नई समितियां भी बनाई जा रही हैं।