MP में क्रूज तो शुरू कर दिए, लेकिन स्पष्ट SOP आज तक नहीं, पर्यटन विभाग का दावा- क्रूज में लाइफ जैकेट अनिवार्य नहीं
जबलपुर के बरगी जलाशय में क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जिसके लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। विभाग पर सुरक्षा मानकों और लाइफ जैकेट के लिए स्पष्ट एसओपी न होने का आरोप है, जबकि मंत्री ने लापरवाही स्वीकार की है।

बरगी में क्रूज डूबा (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, भोपाल। जबलपुर जिले के बरगी जलाशय में हुए क्रूज हादसे में 13 मौत हो गई। हर कोई इसके लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को जिम्मेदार मान रहा है यद्यपि वह यह साबित करने में जुटा है कि इस हादसे के लिए वह कतई जिम्मेदार नहीं है। क्रूज चलाने से पहले मौसम का अलर्ट जानने तक की व्यवस्था नहीं थी, पर अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उस शाम कोई लापरवाही नहीं हुई। मौसम साफ था। अचानक आए परिवर्तन से हादसा हुआ।
लाइफ जैकेट थे, पर पहनना अनिवार्य नहीं
उनका कहना है कि लाइफ जैकेट भी पर्याप्त थे और इन्हें पहनना अनिवार्य भी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मापदंड यही हैं लेकिन इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं कि यदि सब कुछ दुरुस्त था तो 13 पर्यटकों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि प्रदेश में पर्यटन के लिए क्रूज तो शुरू कर दिए, मगर स्थानीय स्तर पर स्पष्ट मानक संचालक प्रक्रिया (एसओपी) ही नहीं है।
सुरक्षा मानकों की व्यापक अनदेखी
क्रूज हादसे का बड़ा कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी को माना जा रहा है। दरअसल, जलाशय में कोई गतिविधि होती है तो सबसे अहम मौसम की चेतावनी और सुरक्षा के साधनों का उपयोग होता है। इन दोनों की घोर उपेक्षा की गई। न तो मौसम के अलर्ट का ध्यान रखा गया और न ही क्रूज के डेक पर जो पर्यटक थे, उन्हें लाइफ जैकेट पहनाई गई।

अंतिम समय में दी लाइफ जैकेट
जब तेज हवा चलने लगीं और बवंडर में क्रूज लड़खड़ाने लगा तो ऊपर डेक पर जो पर्यटक थे वे नीचे आ गए। इनमें से किसी ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। नीचे आए तो इन्हें जैकेट दी गईं। पानी भरने के कारण जो लोग बाहर निकल गए, वे तो बच गए लेकिन जो फंस गए, उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा।
लाइफ जैकेट को लेकर कोई स्थानीय एसओपी नहीं
मध्य प्रदेश पर्यटन के जल क्रीड़ा के सलाहकार नेवल कमांडर राजेंद्र निगम ने मीडिया से चर्चा में दावा किया कि क्रूज में यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनने को लेकर कोई स्थानीय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नहीं है। जलाशय में चलने वाली नावों पर पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं है।
क्रूज पर पर्याप्त लाइफ जैकेट थे। तर्क दिया जा रहा है कि जब कभी मौसम खराब होता है तो क्रूज का पायलट संदेश देता है कि सभी यात्री सुरक्षा की दृष्टि से लाइफ जैकेट पहन लें। ठीक वैसे ही जैसे विमान में ऑक्सीजन कम होने या टर्बुलेंस की स्थिति बनने पर सुरक्षा सलाह दी जाती है।

येलो अलर्ट जारी, फिर भी...
सूत्रों का कहना है कि मौसम विभाग ने जो अलर्ट जारी किया, उसमें पहले सब सामान्य बताया और संशोधित रिपोर्ट में यलो अलर्ट शो किया। मौसम विभाग के विज्ञानी अरुण शर्मा का कहना है कि हम किसी के लिए अलग से अलर्ट जारी नहीं करते हैं।
मौसम संबंधी अलर्ट देने का एक सिस्टम है। सभी संबंधितों की रिपोर्ट दी जाती है। इसके आधार पर स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं की जाती हैं। उधर, पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य था। प्रारंभिक पड़ताल में यह पहले यह ग्रीन और बाद में यलो दर्शाया गया। यलो अलर्ट में संचालन प्रतिबंधित नहीं होता है मगर सावधानी रखनी पड़ती है।

चूक बनी बड़े हादसे का सबब
यहीं चूक हुई जो इतनी बड़े हादसे का सबब बनी। इसे देखा ही नहीं गया। मौसम तेजी से बदला, जिससे किसी को भी कुछ सोचने-समझने का मौका ही नहीं मिला। आपात स्थिति से निपटने के लिए वोट क्लब पर काम करने वाले सभी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाता है। हादसे के समय वोट पहुंच भी गई थी और पर्यटकों को बचाया भी गया, लेकिन जो लोग नीचे फंस गए थे, उनकी मृत्यु हो गई।
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लापरवाही तो थी, नई एसओपी जारी करेंगे
उधर, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इतना तो माना कि लापरवाही तो हुई है। प्रारंभिक तौर पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी की गई है और जांच टीम भी बना दी है। सभी जगह क्रूज बंद करवा दिए गए हैं। एक सप्ताह में रिपोर्ट आएगी, जिसके आधार पर एसओपी भी जारी करेंगे।
जहां तक मौसम के अलर्ट की अनदेखी की बात है तो यह अचानक परिवर्तित हुआ। पहले हवा नहीं चल रही थी लेकिन बाद में तूफान आ गया। लाइफ जैकेट तो पर्याप्त थीं। डेक पर ऊपर जो लोग थे, वे वीडियो में लाइफ जैकेट के बिना नजर आ रहे हैं, यह बात सही है लेकिन जब तेज हवा चलने लगी तो नीचे आए और सबको लाइफ जैकेट दिए गए। उन्होंने पहने भी मगर वे निकल ही नहीं पाए।
