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MP में नई तबादला नीति को मिली मंजूरी...1 से 15 जून तक होंगे ट्रांसफर, पति-पत्नी और गंभीर बीमार कर्मचारियों को राहत

Published: Wed, 20 May 2026 04:18 PM (IST)Updated: Wed, 20 May 2026 06:10 PM (IST)

मध्य प्रदेश में 1 से 15 जून तक सरकारी कर्मचारियों के तबादले होंगे, जिसके लिए नई नीति 2026 को मंजूरी ...और पढ़ें

मंत्रालय में मोहन कैबिनेट की बैठक।

मंत्रालय में मोहन कैबिनेट की बैठक।

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। नई व्यवस्था के तहत राज्य और जिला स्तर पर 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे। सरकार ने इस बार प्रशासनिक जरूरतों के साथ कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तैयार किए गए तबादला नीति के मसौदे में स्वैच्छिक और प्रशासनिक दोनों तरह के तबादलों के लिए अलग-अलग व्यवस्था तय की गई है। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की सहमति के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया।

पति-पत्नी को एक स्थान पर रखने पर जोर

नई नीति में पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पदस्थापना के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों को भी स्थानांतरण में विशेष राहत मिलेगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री की ‘ए प्लस’ श्रेणी वाली नोटशीट के मामलों का निपटारा 31 मई तक करने का निर्णय लिया गया है।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने और गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा गया है, ताकि ऐसे मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जा सके।

स्कूल शिक्षा विभाग की नीति रहेगी अलग

हर वर्ष की तरह इस बार भी स्कूल शिक्षा विभाग अपनी अलग तबादला नीति लागू करेगा। इसके अलावा जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अलग दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं, हालांकि मूल ढांचा राज्य सरकार की नीति के अनुरूप रहेगा।

ऑनलाइन जारी होंगे ट्रांसफर ऑर्डर

सरकार ने तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सभी ट्रांसफर आदेश ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से जारी करने का निर्णय लिया है। जिन विभागों में ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां ऑफलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

अनुसूचित क्षेत्रों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। इसके बाद गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

इन कर्मचारियों को मिलेगी विशेष राहत

तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्कूलों में कार्यरत अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत के अनुसार दूसरे संस्थानों में भेजा जाएगा। वहीं गंभीर रूप से बीमार या सेवानिवृत्ति के निकट शिक्षकों को स्थानांतरण से राहत दी जाएगी। कर्मचारी संघों के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार वर्ष तक तबादलों से छूट देने का भी निर्णय लिया गया है।

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