MP में सरकारी धन पर 'डिजिटल पहरेदारी' का असर: 530 से ज्यादा पर FIR, 22 कर्मचारी बर्खास्त; 223 करोड़ की संचित निधि में वापसी
मध्य प्रदेश में स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC) की निगरानी से 530 से अधिक लोगों पर FIR हुई और 22 ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
SFIC ने 530 से अधिक आरोपितों पर FIR दर्ज कराई।
22 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है।
223 करोड़ रुपये की राशि सफलतापूर्वक वापस कराई गई।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में शासकीय निधियों के संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही निगरानी के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेस सेल (एसएफआईसी) द्वारा डेटा एनालिटिक्स के आधार पर किए गए गहन विश्लेषण के बाद 530 से अधिक आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
गंभीर मामलों में संलिप्त 22 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस सख्त निगरानी और समानांतर जांच प्रणाली से अब तक गबन एवं अनियमित ट्रांसफर की कुल 223 करोड़ रुपये की राशि शासन की संचित निधि में सफलतापूर्वक वापस कराई जा चुकी है।
315 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल
एसएफआईसी द्वारा वर्ष 2011 से अब तक के वित्तीय लेनदेन का नियमित डेटा विश्लेषण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कुल 315 करोड़ रुपये की राशि को 'संदिग्ध श्रेणी' में चिह्नित कर जांच के अधीन रखा गया है। पुरानी अवधि के आंकड़ों के विश्लेषण से अद्यतन हुई इस राशि पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शासन द्वारा 61 करोड़ रुपये के प्रमाणित गबन की वसूली पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही 162 करोड़ रुपये शासकीय बैंक खाते से सरकारी खजाने में जमा कराया गया है।
सख्त धाराओं में प्रकरण दर्ज
मामलों की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा पुलिस महानिदेशक से कहा गया था कि जांच में प्रमाणित गबन के प्रकरणों में पुलिस एफआइआर दर्ज करते समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की कठोर एवं सुसंगत धाराएं जोड़े। इसके बाद पुलिस स्तर से आरोपितों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी है।
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भविष्य के लिए लागू और प्रस्तावित अभेद्य सुरक्षा तंत्र
वित्तीय प्रणालियों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बीते तीन वर्षों में कई निरोधात्मक उपाय लागू किए गए हैं। मैन्युअल सिस्टम खत्म कर ई-जीपीएफ और ई-डीपीएफ के लिए महालेखाकार कार्यालय और पेंशन संचालनालय से ऑनलाइन अप्रूवल की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू की गई है। इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डिजिटल सिग्नेचर, वेतन भत्तों में कैपिंग सिस्टम, आधार आधारित भुगतान, रोम्स पोर्टल और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफार्म को अनिवार्य किया गया है।
स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेस सेल (एसएफआईसी) का यह काम पिछले आठ साल से चल रहा है। ट्रेजरी रूटीन में संदिग्ध ट्रांजेक्शन होते हैं, उनको फ्लैग करती है और जांच कराती है। इसमें आधे से ज्यादा मामलों गड़बड़ी नहीं निकलती है।
- अमनवीर सिंह बैस, आयुक्त, मध्य प्रदेश कोष लेखा
