MP में उच्च शिक्षा विभाग का कारनामा : वरिष्ठता सूची में मृत व सेवानिवृत्त प्राध्यापक भी शामिल, प्रोफेसरों को बना दिया असिस्टेंट प्रोफेसर
मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी 2012 की वरिष्ठता सूची में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। 14 साल बाद जारी इस सूची में मृत और सेवानिवृत्त प्रा ...और पढ़ें

कॉलेज प्राध्यापक (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थ सहायक प्राध्यापकों की वरिष्ठता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2012 की वरिष्ठता सूची को विभाग ने 14 वर्ष बाद 2026 में जारी किया है, जिसमें भी कई विसंगतियां सामने आई हैं। सूची में ऐसे प्राध्यापकों को भी सहायक प्राध्यापक बताया गया है, जिन्हें वर्ष 2018 में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अनुशंसा के बाद प्रोफेसर का पदनाम दिया जा चुका है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग द्वारा जारी सूची में मृत और सेवानिवृत्त प्राध्यापकों के नाम भी शामिल कर दिए गए हैं। इनमें विभाग में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) के रूप में पदस्थ रहे धीरेंद्र शुक्ला का नाम भी शामिल है, जबकि उनका निधन पिछले वर्ष हो चुका है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
दूसरी ओर न्यायालय में लंबित एक प्रकरण में विभाग ने यह भी कहा है कि भर्ती नियमों में पदनाम का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब नियमों में पदनाम का प्रावधान ही नहीं है, तो वर्ष 2018 में करीब एक हजार सहायक प्राध्यापकों को प्राध्यापक का पदनाम देकर उसके आधार पर लाभ कैसे दिए गए। अब नई वरिष्ठता सूची में उन्हें फिर से सहायक प्राध्यापक बताया जा रहा है।
प्राध्यापकों का कहना है कि वरिष्ठता सूची हर तीन वर्ष में जारी की जानी चाहिए, लेकिन विभाग ने 14 वर्ष बाद सूची जारी की है। इससे कई प्रशासनिक और सेवा संबंधी विवाद उत्पन्न हो गए हैं। विभाग द्वारा जारी सूची में कुल करीब 1300 प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों के नाम शामिल हैं।
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सूची में सेवानिवृत्त प्राध्यापकों के नाम भी शामिल
जारी वरिष्ठता सूची में करीब 100 सेवानिवृत्त प्राध्यापकों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इनमें भेल कॉलेज से सेवानिवृत्त एके. महानायक, उमरिया कॉलेज के अभय पांडेय, नूतन कॉलेज की अलका वर्मा, मुक्ता श्रीवास्तव तथा उच्च उत्कृष्टता संस्थान की प्रोफेसर सुरभि गरदे जैसे नाम शामिल हैं, जो पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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प्राध्यापकों को फिर बना दिया सहायक प्राध्यापक
सूची में करीब 500 ऐसे प्राध्यापकों के नाम हैं, जिन्हें प्रोफेसर का पदनाम मिलने के बाद भी सहायक प्राध्यापक के रूप में दर्शाया गया है। इसमें संतोष भार्गव और रामनारायण स्वर्णकार सहित कई अन्य प्राध्यापकों के नाम शामिल हैं। इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है।
2012 की सूची अब तैयार हुई है। इस कारण अभी जारी हुई है। यह अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी की गई है। इस पर दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं। 15 दिन के भीतर प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद संशोधित वरिष्ठता सूची फिर से जारी की जाएगी।
- प्रबल सिपाहा, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग