MP में अब विकास परियोजनाओं के आड़े नहीं आएगा भूमि अधिग्रहण, चार गुना तक मिलेगा मुआवजा, किसानों के लिए बड़ी राहत
मध्य प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अब आसान होगा, क्योंकि सरकार मुआवजा चार गुना तक बढ़ाने जा रही है। इस निर्णय से किसानों को बड़ी रा ...और पढ़ें

विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
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वैभव श्रीधर, भोपाल। मध्य प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए तेजी के साथ अधोसंरचना विकास किया जा रहा है। पूंजीगत बजट एक लाख करोड़ तक पहुंच गया है, लेकिन भूमि अधिग्रहण के मामले विकास परियोजनाओं के आड़े आ रहे हैं। कहीं सिंचाई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं तो कहीं सड़क। विलंब से लागत भी बढ़ रही है। किसान और प्रभावित आंदोलन भी कर रहे हैं।
गुणांक बढ़ाकर दोगुना करने की तैयारी
इस समस्या के समाधान के लिए अब भूमि अधिग्रहण पर दिया जाना वाला मुआवजा चार गुना तक बढ़ाया जाएगा। दरअसल, अभी प्रदेश में फैक्टर एक लागू है, जिसे दो तक ले जाने की अनुशंसा मंत्रिमंडलीय समिति ने की है, जिस पर राजस्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट की बैठक में जल्द ही रखा जाएगा।
भूमि अधिग्रहण के मुद्दों को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप की समिति बनाई थी। इसने भारतीय किसान संघ, औद्योगिक संगठनों के साथ बात की, उनके सुझाव लिए और गुजरात, केरल, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन किया।
ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था
इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करके सरकार को दी। सूत्रों के अनुसार, समिति ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में अलग-अलग मुआवजा देने के लिए गुणांक दो तक करने की अनुशंसा की है। इसके आधार पर राजस्व विभाग ने प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है, जिसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लागू होने पर मुआवजा अधिकतम चार गुना तक मिलेगा।
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भारतीय किसान संघ ने की थी मांग
भारतीय किसान संघ सहित अन्य संगठन लंबे समय से विकास परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण पर मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। दरअसल, अभी 2015 के नियम के अनुसार मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के समय मुआवजे की गणना बाजार मूल्य से गुणांक एक ही प्रयोग किया जाता है।
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भारतीय किसान संघ के प्रांताध्यक्ष कमल सिंह आंजना का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में गुणांक दो और शहरी क्षेत्र में एक का प्रयोग होना चाहिए। भूमि के मुआवजे की गणना के समय भूमि की गाइडलाइन को ही बाजार मूल्य मान लिया जाता है, जबकि बाजार मूल्य निर्धारण में तुलनात्मक संपत्ति मूल्यांकन, विशेषज्ञों की राय, भूमि की क्षमता, भूमि पर निर्भर रोजगार आदि विषयों को दरकिनार किया जाता है।