MP में अब ‘स्मार्ट पुलिस ट्रेनिंग’ की तैयारी : AI से होगी संदिग्धों की पहचान, वर्चुअल फायरिंग से मिलेगा रियल अनुभव
मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षकों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वर्चुअल तकनीकों को शामिल करने की तैयारी है। इसमें AI आधारित फेशियल र ...और पढ़ें

आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से पुलिस प्रशिक्षण (एआई जनित इमेज)
HighLights
AI-आधारित फेशियल रिकॉग्निशन से संदिग्धों की सटीक पहचान होगी।
वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर से मिलेगा वास्तविक गोलीबारी का अनुभव।
डिजिटल सैंड मॉडल और AI आउटडोर ट्रेनिंग में सहायक होंगे।
शशिकांत तिवारी, भोपाल। सीसीटीवी या वाडी वार्न कैमरों के वीडियो फुटेज में संदिग्ध की सटीक पहचान करना हो या फिर अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम व सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से यह काम आसान हो जाएगा। प्रदेश में पुलिस आरक्षकों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में एआई के विभिन्न तरह से उपयोग के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल जोड़ने की तैयारी है। इसी तरह से शूटिंग यानी गोली चलाने की वर्चुअल ट्रेनिंग सहित दो अन्य प्रस्ताव भी हैं।
पुलिस आरक्षकों के वर्ष 2025 के बैच में ये नए मॉड्यूल शामिल किए जा सकते हैं। अभी इस बैच के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसी वर्ष मई तक इनकी ज्वाइनिंग कराने की तैयारी है। पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने डीजीपी को यह प्रस्ताव भेजा है, जिसे शीघ्र ही स्वीकृति मिलने की आशा है।
AI से लैस होगा ट्रेनिंग सिस्टम
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में जो चार नए विषय जोड़ने या बदलने की तैयारी है, उसमें मौजूदा 'कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्युरिटी' कोर्स में एआई को शामिल करना, आउटडोर ट्रेनिंग में एआई का इस्तेमाल, वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर और डिजिटल सैंड मॉडल शामिल हैं। दरअसल, पुलिस को आज के समय की चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने की दृष्टि से तैयार किया जा रहा है।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण नवीनतम तकनीकें हैं। इस दृष्टि अभी प्रशिक्षण ले रहे वर्ष 2023 के बैच में भी साइबर अपराध सहित कई विषय जोड़े थे। अब हर क्षेत्र में एआई के बढ़ते उपयोग की दृष्टि से इसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि अपराधी भी अपराधों में एआई का उपयोग कर रहे हैं।
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'कंप्यूटर अवेयरनेस व साइबर सिक्युरिटी' कोर्स में इस तरह होगा AI का उपयोग
प्रदेश के सभी सात पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (पीटीएस) में दिए जा रहे प्रशिक्षण में 'कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्युरिटी' शामिल है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षुओं को साइबर धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। अब इसमें एआई को शामिल किए जाने के बाद पुलिस आरक्षक व अन्य संवर्ग के प्रशिक्षु सर्विलांस सिस्टम (निगरानी व्यवस्था) और फेशियल रिकग्निशन तकनीक में दक्ष हो सकेंगे। फेशियल रिकग्निशन पुलिसिंग टूल्स वीडियो, इमेज और आडियो एनालिसिस के माध्यम से संदिग्धों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
अभ्यास के दौरान गलतियां भी बताएगा AI
अभ्यास (ड्रिल) में हिस्सा लेने वाला प्रशिक्षु अपनी गलतियां खुद नहीं देख पाता। ड्रिल मास्टर ही उसे गलतियां बताता और सुधरवाता है। अभ्यास और आउटडोर ट्रेनिंग में एआई का उपयोग शुरू होने के बाद प्रशिक्षु अपना अभ्यास खुद देख पाएंगे। जैसे एआई उन्हें सही मुद्रा (पोस्चर) के बारे में बताएगा।
वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर और डिजिटल सैंड माडल
अगर कभी कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या पैदा होती है, तो भीड़ के बीच बंदूक चलाने के प्रशिक्षण में यह बहुत ही आधुनिक कदम है। अभी, प्रशिक्षु मैदान में फायरिंग की प्रैक्टिस करते हैं। कभी-कभी यह उनके लिए सुरक्षित नहीं होता और प्रदर्शन भी आशा के अनुरूप नहीं होता। उन्हें यह अनुभव भी बहुत अच्छे से नहीं मिल पाता कि भीड़ में गोली किस तरह से चलानी है।
प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो प्रशिक्षु वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर के जरिये जंगल, पहाड़ और भीड़भाड़ वाली जगहों पर गोली चलाने का प्रशिक्षण ज्यादा बेहतर तरीके से ले पाएंगे। इसी तरह से डिजिटल सैंड माडल का उपयोग बीएसएफ की तरह मध्य प्रदेश पुलिस करेगी। इसमें प्रशिक्षुओं को ऑडियो-विजुअल, 3-डी मॉडल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में परिवर्तन और एआई जैसे नए विषयों को जोड़ने के लिए प्रस्ताव पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है। पुलिस को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने में इनसे बड़ी मदद मिलेगी।
- राजाबाबू सिंह, एडीजी, प्रशिक्षण