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    MP में 10 साल से अटकी पदोन्नतियों पर अगले सप्ताह आ सकता है हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों की निगाहें टिकीं

    Updated: Sun, 31 May 2026 08:24 PM (IST)

    मध्य प्रदेश में वर्षों से लंबित पदोन्नतियों पर जबलपुर हाई कोर्ट अगले सप्ताह फैसला सुना सकता है। यह निर्णय लाखों सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के ल ...और पढ़ें

    पदोन्नति को लेकर जल्द आ सकता है बड़ा फैसला। (प्रतीकात्मक चित्र)

    पदोन्नति को लेकर जल्द आ सकता है बड़ा फैसला। (प्रतीकात्मक चित्र)

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    राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्षों से लंबित पदोन्नतियों को लेकर जल्द बड़ा फैसला सामने आ सकता है। पदोन्नति नियम-2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद जबलपुर हाई कोर्ट अगले सप्ताह अपना निर्णय सुना सकता है। फैसले का इंतजार केवल सरकारी कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार को भी है, क्योंकि इसके अभाव में नियुक्तियों और पदोन्नतियों से जुड़ी कई प्रक्रियाएं अटकी हुई हैं।

    मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 17 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस बीच सर्वोच्च न्यायालय भी स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए फैसले 90 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहने चाहिए। ऐसे में शासन और कर्मचारियों के बीच यह उम्मीद बढ़ गई है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णय अब जल्द सामने आ सकता है।

    2016 से रुकी हुई हैं नियमित पदोन्नतियां

    गौरतलब है कि वर्ष 2016 में उच्च न्यायालय ने पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े 2002 के नियमों को निरस्त कर दिया था। इसके बाद से प्रदेश में नियमित पदोन्नतियों की प्रक्रिया लगभग ठप है। इस स्थिति का असर प्रशासनिक व्यवस्था, विभागीय ढांचे और कर्मचारियों के कैरियर ग्रोथ पर लगातार पड़ रहा है।

    सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन ने संभावित निर्णय को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। नए पदोन्नति नियम-2025 के अनुसार पदों का चिन्हांकन किया जा चुका है और विभागीय पदोन्नति समितियों का गठन भी कर दिया गया है। अब केवल न्यायालय के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।

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    उच्च पदों का प्रभार देने की व्यवस्था फिर शुरू

    पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने के कारण शासन ने पहले कई विभागों को उच्च पदों का प्रभार देने से भी रोका था। हालांकि यह मामला भी न्यायालय पहुंचा, जिसके बाद पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यवाहक प्रभार देने का रास्ता साफ हुआ।

    इसी के तहत पुलिस मुख्यालय ने वरिष्ठता के आधार पर उच्च पदों का कार्यवाहक प्रभार देने की व्यवस्था फिर शुरू कर दी है। सभी इकाइयों और कार्यालयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।

    लोक निर्माण विभाग ने बनाई 11 सदस्यीय समिति

    हाई कोर्ट के संभावित निर्णय को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने उच्च पदों का प्रभार देने से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए मुख्य अभियंता संजय खांडे की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति गठित की है।

    यह समिति वर्ष 2010 और उसके बाद नियुक्त सहायक यंत्रियों को उच्च पद का प्रभार देने संबंधी प्रस्ताव तैयार करेगी। समिति अब तक दो बैठकें कर चुकी है और विभिन्न विभागों के नियमों का अध्ययन भी किया जा चुका है।

    हालांकि समिति के गठन को लेकर कुछ सवाल भी उठे हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि वरिष्ठ इंजीनियरों से जुड़े मामलों की समीक्षा करने वाली समिति में अपेक्षाकृत नई बैच के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। बावजूद इसके विभाग का कहना है कि सभी पहलुओं पर विचार कर निष्पक्ष प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

    फैसले से बदलेगी प्रशासनिक तस्वीर

    यदि हाई कोर्ट पदोन्नति नियम-2025 को वैध ठहराता है, तो प्रदेश में वर्षों से लंबित पदोन्नतियों का रास्ता खुल सकता है। इससे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, वहीं कई विभागों में रिक्त उच्च पदों पर नियमित नियुक्तियां भी संभव हो सकेंगी।

    इसी कारण अब शासन, कर्मचारी संगठनों और विभिन्न विभागों की निगाहें हाई कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं, जो प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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