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    MP में नौ साल बाद लौटेगी छात्र राजनीति की रौनक! इसी सत्र में होंगे छात्रसंघ चुनाव, हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने शुरू की तैयारी

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 11:23 PM (IST)

    मध्य प्रदेश में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव फिर से होने जा रहे हैं, जबलपुर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा म ...और पढ़ें

    -प्रतीकात्मक चित्र

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    HighLights

    1. नौ साल बाद मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव होंगे।

    2. जबलपुर हाई कोर्ट के निर्देश पर सरकार की तैयारी।

    3. उच्च शिक्षा मंत्री ने कोर्ट के आदेश पालन की बात कही।

    डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव होने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। वर्ष 2017 के बाद से बंद छात्रसंघ चुनाव अब इसी शैक्षणिक सत्र में कराए जाने की तैयारी है। जबलपुर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करेगी। ऐसे में करीब नौ वर्ष से थमी छात्र राजनीति एक बार फिर प्रदेश के शैक्षणिक परिसरों में सक्रिय होने की उम्मीद है।

    2017 के बाद से नहीं हुए चुनाव

    मध्य प्रदेश में आखिरी बार वर्ष 2017 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे। इसके बाद कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में विवाद, हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को आधार बनाकर चुनाव टाल दिए गए।

    बाद के वर्षों में कोरोना महामारी का हवाला देकर भी चुनाव नहीं कराए गए। दूसरी ओर छात्र संगठन लगातार चुनाव बहाल करने की मांग करते रहे हैं।

    हर साल छात्रसंघ के नाम पर लिया जाता है शुल्क

    दिलचस्प बात यह है कि चुनाव नहीं होने के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के अकादमिक कैलेंडर में हर वर्ष सितंबर के दौरान छात्रसंघ गठन का समय निर्धारित किया जाता रहा है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रत्येक विद्यार्थी से 15 रुपये वार्षिक छात्रसंघ शुल्क भी लेते हैं।

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    प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब 14 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस हिसाब से छात्रसंघ के नाम पर एकत्र होने वाली राशि शासन के पास जमा होती है।

    कॉलेजों को शासन के आदेश का इंतजार

    छात्रसंघ चुनाव कराने की व्यवस्था को लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालय लंबे समय से शासन के निर्देशों का इंतजार करते रहे हैं। चुनाव न होने के कारण छात्र राजनीति से जुड़े संगठनों की गतिविधियां भी सीमित रही हैं। अब हाई कोर्ट के रुख के बाद इस मुद्दे पर तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है।

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    हाई कोर्ट ने कहा- छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय

    सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान जबलपुर हाई कोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव कराने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।

    सुनवाई के दौरान शासन की ओर से भी चुनाव कराने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके बाद सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू करने के संकेत मिले हैं।