MP में UCC मसौदा अंतिम चरण में, लिव-इन को लेकर तेज हुई बहस; धर्मगुरुओं ने जताई आपत्ति
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा अंतिम चरण में है, लेकिन इसमें लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता देने का धार्मिक संगठनों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है।

एमपी में यूसीसी की कवायद तेज। (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
UCC मसौदा अंतिम चरण में, 30 जून तक सौंपने की तैयारी।
धार्मिक संगठन लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता देने के खिलाफ।
मुख्यमंत्री के अनुसार, 90% से अधिक नागरिक UCC के पक्ष में।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देने की तैयारी के बीच इसका विरोध भी किया जाने लगा है। धार्मिक संगठनों के प्रमुख इसके खिलाफ हैं। धर्मगुरुओं का कहना है कि लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता समाज के हित में नहीं है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने यूसीसी में लिव-इन के प्रावधान शामिल न करने का विरोध किया है। महिला आयोग की सदस्य साधना स्थापक का भी कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप पर अलग से चर्चा होनी चाहिए। कम उम्र में बच्चे गलत निर्णय ले लेते हैं। इस मुद्दे पर अलग से समिति होनी चाहिए। एक सुझाव यह भी आया कि लिव इन रिलेशनशिप में रहना है तो 30 दिनों में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
जून अंत तक पूरा करने की तैयारी
इधर, समिति की तैयारी है कि 30 जून तक प्रक्रिया पूरी कर पांच जुलाई तक विधेयक का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंप दिया जाए। सरकार की मंशा 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे प्रस्तुत करने की है।
लिव-इन को लेकर सख्त ऐतराज
यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर धार्मिक सामाजिक संगठनों के अधिकतर प्रमुखों ने यूसीसी में मान्यता नहीं देने का सुझाव रखा है। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि यूसीसी में लिव इन रिलेशन को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। यूसीसी में लिव इन का कॉलम ही नहीं होना चाहिए। क्योंकि यह सनातन संस्कृति के खिलाफ है।
भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली ने कहा कि हमारा कानून कुरान हदीस है। लिव इन रिलेशन को मान्यता देने का उन्होंने भी विरोध करते हुए कहा कि बिना निकाह किसी लड़की को साथ रखना तो दूर देखना भी गुनाह है। यदि यह कानून लाया जाता है तो सामाजिक ताना-बाना बिखर जाएगा। जो बच्चा पैदा होगा वह किसका कहलाएगा। कौन परवरिश करेगा। यूसीसी के अभी जरूरत ही नहीं है।
कैथोलिक क्रिश्चियन कमेटी के आर्च बिशप एएएस दुराई राज ने कहा कि विविधता में एकता बरकरार रखना जरूरी है। बौद्ध धर्म गुरु भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने कहा, समान नागरिक संहिता बनाने में भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का पूरा सम्मान किया जाए। बौद्ध धर्म की धार्मिक स्वतंत्रता संविधान के अनुरूप सुरक्षित रखनी चाहिए।
यूसीसी के पक्ष में हैं 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक : मुख्यमंत्री
मंगलवार को मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए सभी जिलों में जनपरामर्श बैठकें हो चुकी हैं। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनीतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया।
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लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजे गए। नागरिकों के नौ लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90 प्रतिशत से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है।
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