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    52 किलो सोना, करोड़ों की नकदी मामले में जल्द पेश होगी चार्जशीट; सौरभ शर्मा के अतिरिक्त 15 से अधिक लोग बनाए जाएंगे आरोपित

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 06:42 PM (IST)

    मध्य प्रदेश के सौरभ शर्मा भ्रष्टाचार मामले में लोकायुक्त जल्द चार्जशीट दाखिल करेगा, जिसमें 15 से अधिक अन्य लोग भी आरोपित बनाए जाएंगे। यह मामला 52 किलो ...और पढ़ें

    पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा (फाइल फोटो)

    पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सौरभ शर्मा भ्रष्टाचार मामले में जल्द दाखिल होगी चार्जशीट।

    2. 52 किलो सोना और करोड़ों की नकदी हुई थी बरामद।

    3. 15 से अधिक अन्य लोग भी बनाए जाएंगे आरोपित।

    राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित सौरभ शर्मा भ्रष्टाचार मामले में लोकायुक्त संगठन जल्द ही बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामले में जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक सितंबर में विशेष अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा सकता है। फिलहाल अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया शेष है।

    लोकायुक्त की जांच में सौरभ शर्मा के अलावा 15 से अधिक लोगों को भी आरोपी बनाए जाने की तैयारी है। इनमें उसकी पत्नी, मां, कारोबारी सहयोगी शरद जायसवाल और चेतन गौर सहित कई रिश्तेदार एवं ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर कथित रूप से अवैध संपत्ति को छिपाने और निवेश करने में मदद करने का आरोप है। इस बीच, जबलपुर हाई कोर्ट से सौरभ शर्मा को मंगलवार को जमानत मिलने के बाद लोकायुक्त संगठन चार्जशीट जल्द दाखिल करने की तैयारी में जुट गया है।

    छापे के बाद मिली थी 52 किलो सोना और करोड़ों की नकदी

    गौरतलब है कि 19 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल स्थित सौरभ शर्मा के घर और कार्यालय पर छापा मारा था। इसके अगले ही दिन आयकर विभाग को भोपाल के मेंडोरी गांव में एक लावारिस कार से 52 किलो सोना और 11.60 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। जांच में कार चेतन गौर के नाम पंजीकृत पाई गई। आयकर विभाग ने फरवरी 2025 में सोने और नकदी को बेनामी संपत्ति मानते हुए राजसात कर लिया था।

    50 से अधिक लोगों से पूछताछ, संपत्तियों की गहन जांच

    लोकायुक्त संगठन ने विवेचना के दौरान 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की है। इनमें अधिकांश वे लोग हैं, जिनके नाम पर छापे के दौरान अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे।

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    जांच में अब तक जिन संपत्तियों का आकलन किया गया है, उनमें करीब 38 करोड़ रुपये मूल्य का 52 किलो सोना, 11.60 करोड़ रुपये नकद, भोपाल स्थित आवास और कार्यालय से बरामद 2.85 करोड़ रुपये नकद, 234 किलो चांदी की सिल्लियां, विभिन्न जमीनें तथा राजगढ़ में मत्स्य पालन से होने वाली आय शामिल है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सौरभ शर्मा ने कई रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर भी निवेश किया था।

    पांच एजेंसियों ने की समानांतर जांच

    इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच केवल लोकायुक्त तक सीमित नहीं रही। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और मध्य प्रदेश पुलिस ने भी अलग-अलग पहलुओं पर जांच शुरू की।

    ईडी ने लोकायुक्त की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर कई स्थानों पर छापे मारे, जबकि मध्य प्रदेश पुलिस सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

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    अधिकारियों और नेताओं की भूमिका पर अब भी सवाल

    सौरभ शर्मा प्रकरण की शुरुआत से ही यह माना जा रहा था कि परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के व्यापक नेटवर्क और कथित संरक्षण देने वाले अधिकारियों व राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका सामने आ सकती है। लोकायुक्त की छापेमारी में परिवहन विभाग से जुड़े दस्तावेज, सील और अन्य रिकॉर्ड भी मिले थे।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक कथित दस्तावेज और डायरी की भी काफी चर्चा रही, जिसमें परिवहन चेक पोस्टों, कथित अवैध वसूली और संक्षिप्त नामों के साथ रकम का उल्लेख होने का दावा किया गया था। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों ने किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया है।

    सौरभ शर्मा के मामले में पूछताछ सहित विवेचना का काम लगभग पूरा हो गया है। हम शीघ्र ही चालान प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।
    - योगेश देशमुख, डीजी, विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त