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    सीहोर के सेठ का अंग्रेजों पर कर्ज: 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दिए ऋण पर ब्रिटेन ने उत्तराधिकारियों से मांगे दस्तावेज

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 07:49 PM (IST)

    सीहोर के रुठिया परिवार ने ब्रिटिश सरकार से 1917 के प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दिए गए 35 हजार रुपये के 'वार लोन' की वापसी के लिए कानूनी पहल की है। ब्रि ...और पढ़ें

    सेठ जुम्मा लाल के उत्तराधिकारी विवेक रुठिया और वार लोन का ऐतिहासिक दस्तावेज

    सेठ जुम्मा लाल के उत्तराधिकारी विवेक रुठिया और वार लोन का ऐतिहासिक दस्तावेज

    HighLights

    1. रुठिया परिवार ने 1917 के ब्रिटिश युद्ध ऋण की वापसी मांगी।

    2. ब्रिटेन के डेट मैनेजमेंट ऑफिस ने साक्ष्य मांगे, प्रक्रिया जारी।

    3. सीहोर के सेठ का 109 साल पुराना कर्ज अब करोड़ों में।

    डिजिटल डेस्क, भोपाल। सीहोर जिले के प्रतिष्ठित नगर सेठ परिवार ने ब्रिटिश हुकूमत को दिए गए 109 साल पुराने कर्ज वार लोन की वापसी के लिए विधिक पहल की है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1917 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को दिए गए 35 हजार रुपये के कर्ज पर रुठिया परिवार ने ब्रिटेन सरकार से अपना दावा ठोका है। इस संबंध में यूनाइटेड किंगडम के डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है, जिसमें दावे को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज मांगे गए हैं।

    पुराने कागजात में मिला ऐतिहासिक दस्तावेज

    विनय रुठिया और उनके छोटे भाई विवेक रुठिया ने बताया कि पारिवारिक पुराने कागजात की छानबीन के दौरान उन्हें 4 जून 1917 का एक ऐतिहासिक प्रमाण-पत्र मिला। उस समय प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन ने सैनिकों के राशन व युद्ध आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहयोग (इंडियन वार लोन) जुटाया था।

    तत्कालीन समय में सीहोर के पॉलीटिकल एजेंट इन भोपाल, डब्ल्यूएस डेविस द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार, सेठ जुम्मा लाल रुठिया फर्म: सेठ रामकिशन जसकरण रुठिया ने ब्रिटिश हुकूमत को 35 हजार रुपये वार लोन के रूप में दिए थे। लोन देने के 20 साल बाद 1937 में सेठ जुम्मा लाल का निधन हो गया था, लेकिन इस कर्ज का भुगतान आज तक नहीं हुआ।

    फरवरी में भेजा था लीगल नोटिस

    विवेक रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांस रानीवाला के माध्यम से इसी साल फरवरी में यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस को ईमेल और हार्ड कापी द्वारा लीगल नोटिस भेजा था। 1917 की 35 हजार रुपये की राशि आज के हिसाब से कई करोड़ रुपये बैठती है। 3 अगस्त को यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस से अधिवक्ता को प्राप्त ई-मेल में कहा गया है कि यदि दावेदार को किसी अप्राप्त भुगतान का अधिकार है, तो वह गिल्ट रजिस्ट्रार से संपर्क करे। ब्रिटेन सरकार के लोन विभाग ने परिवार से मूल प्रमाण-पत्र व पत्राचार की प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा है ताकि दावे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।

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    शहर की 40 प्रतिशत बसाहट और जमीनों का भी दावा

    रुठिया परिवार का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु देश अपने पुराने कर्ज को चुकाने के लिए बाध्य होता है। इसके साथ ही विवेक रुठिया ने दावा किया कि सीहोर शहर की 40 से 45 फीसदी बसाहट उनकी पारिवारिक जमीन पर है। इंदौर, सीहोर और भोपाल में परिवार की कई संपत्तियां दर्ज हैं, जिन पर लोगों का कब्जा है या विवाद चल रहा है।

    कई दुकानों व मकानों में रहने वाले लोग आज भी पुराने हिसाब से 50 से 500 रुपये ही किराया दे रहे हैं। परिवार का कहना है कि वे जल्द ही ब्रिटिश अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेज सौंपेंगे और साथ ही भारत सरकार से भी इस पुराने युद्ध ऋण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग करेंगे।

    प्रमुख बिंदु

    दस्तावेज की तारीख: 4 जून 1917 (हस्ताक्षर: डब्ल्यूएस डेविस, पालीटिकल एजेंट इन भोपाल)
    मूल राशि: 35,000 (प्रथम विश्व युद्ध के समय)
    वर्तमान स्थिति: ब्रिटेन सरकार के लोन विभाग द्वारा साक्ष्यों की मांग, प्रक्रिया जारी।