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    इंग्लिश बाबू वेड्स देसी मेम... भोपाल की छोरी संग ब्याह रचाने 'जनेऊ' कराएगा लंदन का छोरा, यूके से आई बारात, सात दिन चलेंगी रस्में

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 10:40 PM (GMT+05:30)

    भोपाल में एक अनोखी अंतर-सांस्कृतिक शादी हो रही है, जहाँ यूके के अलेक्जेंडर भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर चिरुता सिंह बैस से विवाह कर रहे हैं। यह शादी पूरी ...और पढ़ें

    कोलार रोड स्थित लड़की के पैतृक निवास पर पूर्ण रीति-रिवाज के साथ पूजन करते वर और वधू पक्ष।

    कोलार रोड स्थित लड़की के पैतृक निवास पर पूर्ण रीति-रिवाज के साथ पूजन करते वर और वधू पक्ष।

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    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल शहर एक ऐसे विवाह समारोह का साक्षी बन रहा है, जहां दो संस्कृतियां नजदीक आई हैं। बरात यूनाइटेड किंगडम (यूके) से आई है। विवाह पूरी तरह वधू पक्ष की राजपूती परंपरा और रिवाज से हो रहा है। इसमें वर का राजपूतों की तरह संस्कार जरूरी है इस कारण दुल्हे का उपनयन संस्कार (जनेऊ) कराया जाएगा।

    लंदन में परवान चढ़ा प्यार

    भोपाल की चिरुता सिंह बैस सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। कुछ साल पहले वह अपनी मास्टर्स डिग्री के लिए यूके की यूनिवर्सिटी आफ ब्रिस्टल गई थीं। पढ़ाई के दौरान यूके के ही डेवोन के अलेक्जेंडर उनके सहपाठी थे। दोनों में पहले दोस्ती हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई। बाद में दोनों यूके में ही नौकरी करने लगे।

    वर पक्ष को भाये भारतीय रीति-रिवाज

    इस साल दोनों ने शादी करने का फैसला किया। अलेक्जेंडर का परिवार चाहता था कि विवाह लंदन में हो। इधर दुल्हन पक्ष ने स्पष्ट किया कि शादी पूरी तरह उनकी परंपरा और रीति-रिवाजों के साथ भोपाल में ही होगी। अलेक्जेंडर के माता-पिता एलिसन स्टेसी और क्रिस्टोफर स्टेसी जब भारत पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि राजपूतों की शादी सात दिन तक चलती है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत, बरात, फेरों सहित कई रस्में शामिल हैं। यह सुनकर उन्होंने खुद इच्छा जताई कि वे इन सभी रीति-रिवाजों को नजदीक से देखना चाहते हैं।

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    तीन दिन पहले आए भोपाल

    अलेक्जेंडर अपने नजदीकी रिश्तेदारों को मित्रों को साथ लेकर तीन दिन पहले ही भोपाल आ गए हैं। फेरे 20 फरवरी को होंगे, तब तक सभी मेहमान नवाजी का आनंद उठा रहे हैं। चिरुता के पिता भूपेंद्र सिंह बैस बिल्डर हैं। उन्होंने बताया कि वे चाहते थे कि उनकी बेटी की शादी उनकी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार हो। वहीं अलेक्जेंडर ने कहा कि उन्हें हमेशा से भारतीय संस्कृति आकर्षित करती रही है और चिरुता के जरिए उन्हें इसे करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।

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    हल्दी-मेहंदी में झूमकर नाचे

    दूल्हे अलेक्जेंडर के साथ भाई मैथ्यू स्टेसी, भाभी जेड, मौसी क्लेयर और मौसा मैथ्यू भी बरात का हिस्सा हैं। मेहंदी और संगीत की शाम में ब्रिटिश परिवार ने भारतीय परिधानों में सजकर नृत्य किया, वहीं हल्दी की रस्म में सभी ने हंसी-खुशी के साथ पारंपरिक रीति निभाई।

    परिवार के लोगों ने बताया कि शादी वाले दिन अलेक्जेंडर पारंपरिक राजपूताना पोशाक पहनेंगे। बरात निकलेगी तो वह घोड़ी पर सवार होकर पहुंचेंगे। दुल्हन पक्ष पूरे उत्साह के साथ उनका स्वागत करने को तैयार है।