'स्कूल चलो' की जल्दी में जोखिम भरी उछाल: विदिशा में स्टाप डैम से उफनती नदी को पार कर पाठशाला जा रहे बच्चे
विदिशा में स्कूली बच्चे उफनती बेतवा नदी के स्टाप डैम को पार कर जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। 5 किलोमीटर का लंबा रास्ता बचाने के लिए वे यह खतरन ...और पढ़ें
HighLights
विदिशा में बच्चे उफनती बेतवा नदी पार कर स्कूल जा रहे।
5 किमी का चक्कर बचाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे।
पिछले साल भी ऐसा ही वीडियो सामने आया था।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश के विदिशा जिले में बारिश के बीच स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने की तस्वीर सामने आई है। विदिशा के ग्राम पलोह में बेतवा नदी के स्टाप डैम को पार करते हुए बच्चे स्कूल जा रहे हैं। इसका एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया है। जिसमें स्कूली छात्र-छात्राएं छलांग लगाते हुए उफनती नदी पर डैम को पार करते दिखाई दे रहे हैं। इस वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पांच किलोमीटर का चक्कर बचाने के लिए उठा रहे जोखिम
पलोह गांव में शासकीय हाई स्कूल संचालित है। नदी के दूसरी तरफ स्थित ककरुआ और आसपास के गांवों के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। सड़क मार्ग से स्कूल तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है, जबकि स्टॉप डैम से होकर दूरी एक किलोमीटर से भी कम रह जाती है।
इसी वजह से बच्चे लंबा रास्ता तय करने के बजाय स्टॉप डैम पार करके स्कूल पहुंचते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक ककरुआ और इमलिया सहित आसपास के गांवों से करीब 10 से 15 बच्चे पलोह के हाई स्कूल में पढ़ने आते हैं।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान इलाके में आवागमन की समस्या गंभीर हो जाती है। रिंग रोड से जीवाजीपुर होते हुए पलोह पहुंचने का रास्ता काफी लंबा है। वहीं बारिश होते ही कई रिपटे और नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे आसपास के गांवों का शहर से संपर्क भी प्रभावित होता है।
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ऐसे में स्टॉप डैम ग्रामीणों के लिए नजदीकी रास्ता जरूर है, लेकिन उफनती बेतवा के बीच इसे पार करना बच्चों के लिए बेहद जोखिम भरा है। पानी का बहाव बढ़ने पर एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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पिछले साल भी सामने आया था वीडियो
ग्राम जीवाजीपुर के सरपंच अमर सिंह ठाकुर ने बताया कि पिछले साल भी इसी तरह का वीडियो सामने आया था। इसके बाद स्कूल प्राचार्य ने बच्चों को स्टॉप डैम के रास्ते नदी पार कर स्कूल आने से मना किया था। इसके बावजूद कुछ बच्चे और ग्रामीण अब भी इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सरपंच के मुताबिक अब बच्चों के अभिभावकों को भी समझाइश दी जाएगी, ताकि वे बारिश के दौरान बच्चों को इस खतरनाक रास्ते से स्कूल जाने से रोकें।
ग्रामीणों के अनुसार हाई स्कूल के बाद बच्चों को पढ़ाई के लिए या तो पलोह आना पड़ता है या फिर विदिशा शहर जाना होता है। शहर की दूरी अधिक होने के कारण आसपास के गांवों के कई बच्चे पलोह के स्कूल में ही दाखिला लेते हैं।