इंदौर दूषित जल कांड : भागीरथपुरा में मौतों पर हाई कोर्ट सख्त, डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर उठाए सवाल
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर हाई कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने शासन की डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर सवाल उठाए, जिसमें 16 मौतें दूषित पानी ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई 28 लोगों की मौत को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही पांच अलग-अलग याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने शासन द्वारा प्रस्तुत डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर सवाल उठाए।
शासन ने रिपोर्ट में बताया है कि अब तक 23 लोगों की मौत का विश्लेषण हो चुका है। इनमें से 16 मौतें दूषित पानी से हुई हैं। तीन की वजह स्पष्ट नहीं है, जबकि चार मौतें अन्य बीमारियों से हुई हैं।
इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि बगैर पोस्टमार्टम यह कैसे तय कर लिया कि दूषित पानी की वजह से सिर्फ 16 मौतें हुई हैं? समिति 16 मौतों के निष्कर्ष तक कैसे पहुंची? इस निष्कर्ष के क्या आधार थे? इस पर सीएमएचओ ने जवाब दिया कि वर्बल आटोप्सी की गई थी। कोर्ट ने सवाल किया कि वर्बल आटोप्सी क्या होती है तो वे बगलें झांकने लगे।
बता दें, वर्बल आटोप्सी एक ऐसा तरीका है जिसका उपयोग मृतक की देखभाल करने वालों या परिवार के सदस्यों से मृत्यु पूर्व के लक्षणों के बारे में पूछताछ कर मौत का कारण पता लगाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग उन मामलों में किया जाता है जहां मृत्यु का कोई औपचारिक, मेडिकल सर्टिफिकेशन नहीं होता।
खबरें और भी
इस बीच, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा डेथ ऑडिट के लिए गठित समिति पर भी सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि जो कमेटी बनी, वह भी सरकारी मेडिकल कालेज के प्रोफेसर की है, तो रिपोर्ट कैसे सही मानी जा सकती है।
इस पर कोर्ट ने कहा, स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर मौतें किस वजह से हुईं? इसे मानने की ठोस वजह क्या है और जो मौतें दूषित पानी से नहीं मानी गई हैं, उन्हें नहीं मानने के पीछे ठोस वजह क्या है? सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
मंगलवार दोपहर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने डेथ ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की।
34 की जगह सिर्फ आठ बिंदुओं पर पानी की जांच
सुनवाई के दौरान नगर निगम द्वारा की जा रही पानी की सैंपलिंग को लेकर भी सवाल उठे। अजय बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम सिर्फ आठ बिंदुओं पर जांच कर रहा है जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 34 बिंदुओं पर पानी की जांच की थी।
जनता को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्थिति बहुत खतरनाक है। भागीरथपुरा मामले की जानकारी मिलते ही हमने हाई कोर्ट की पानी की टंकी की जांच करवाई। महू से भी दूषित पानी की खबरें आ रही हैं। शासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को स्वच्छ पानी मिले, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।