स्वच्छता में सिरमौर शहर इंदौर में गंभीर जलसंकट: नर्मदा से पेयजल आपूर्ति लड़खड़ाई, टैंकरों के भरोसे आधी से ज्यादा आबादी
स्वच्छता में अग्रणी इंदौर शहर गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहा है, जहाँ आधी से अधिक आबादी पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर है। बढ़ती गर्मी, सूखते बोरवेल ...और पढ़ें

टैंकर से पानी सप्लाई (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बनाने वाला इंदौर इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर की आधे से अधिक आबादी को पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी, सूखते बोरवेल और सीमित जल संसाधनों ने शहर के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
करीब 35 लाख से अधिक आबादी वाले इंदौर की प्रमुख जल आपूर्ति लगभग 70 किलोमीटर दूर बहने वाली नर्मदा नदी पर आधारित है। इसके अलावा शहरवासियों ने निजी स्तर पर बड़ी संख्या में बोरवेल भी कराए हैं, जिनकी संख्या लगभग सवा लाख बताई जाती है। हालांकि लगातार गिरते भूजल स्तर और अपर्याप्त जल संरक्षण के कारण बड़ी संख्या में बोरवेल अब सूख चुके हैं।
जल संरक्षण की कमी भी बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा जल का पर्याप्त संचयन नहीं होने से भूजल स्तर लगातार प्रभावित हुआ है। हर साल बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बह जाता है, लेकिन उसे जमीन में सहेजने की प्रभावी व्यवस्था नहीं बन पाई। इसका असर अब गर्मी के मौसम में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
स्थिति यह है कि न केवल बोरवेल जवाब दे रहे हैं, बल्कि नर्मदा परियोजना से होने वाली जल आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में पर्याप्त नहीं पड़ रही है। इसके चलते शहर के अलग-अलग इलाकों में जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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नर्मदा परियोजना ने बदली थी तस्वीर, अब फिर चुनौती
इंदौर में पानी की समस्या नई नहीं है। वर्ष 1970 के दशक में भी शहर सूखे जैसी स्थिति का सामना कर चुका है। उस समय पेयजल संकट ने लोगों को भारी परेशानी में डाल दिया था, जिसके बाद नर्मदा का पानी शहर तक लाने की मांग को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन हुए थे।
वर्ष 1978 में नर्मदा परियोजना के पहले चरण से शहर को 90 एमएलडी पानी मिलने लगा। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण के जरिए जल आपूर्ति बढ़कर 430 एमएलडी तक पहुंची। लेकिन बीते दो दशकों में शहर का तेजी से विस्तार हुआ, जबकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल प्रबंधन पर अपेक्षित गति से काम नहीं हो सका।
चौथे चरण पर काम शुरू, लेकिन राहत में लगेगा समय
नगर निगम ने अब नर्मदा परियोजना के चौथे चरण पर काम शुरू किया है, लेकिन इसे पूरा होने में अभी लगभग तीन वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में गर्मी के दौरान शहरवासियों को जल संकट से राहत मिलने में समय लग सकता है।