Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ का कंकाल मिलने से हड़कंप, मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटा वन विभाग

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 05:20 PM (IST)

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मानसून गश्त के दौरान एक बाघ का कंकाल मिला, जिससे वन विभाग में चिंता बढ़ गई है। मौत की वजह जानने के लिए जैविक नमूने जांच हेतु ...और पढ़ें

    वनकर्मियों ने किया बाघ के अवशेष का अंतिम संस्कार। (सौजन्य- वन प्रबंधन)

    वनकर्मियों ने किया बाघ के अवशेष का अंतिम संस्कार। (सौजन्य- वन प्रबंधन)

    HighLights

    1. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मानसून गश्त के दौरान बाघ का कंकाल मिला।

    2. वन विभाग ने मौत का कारण जानने के लिए जांच शुरू की।

    3. उमरिया जिले में 2026 तक 11 बाघों की मौत दर्ज हुई।

    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) में मानसून गश्त के दौरान एक बाघ का कंकाल मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। ताला परिक्षेत्र के दुर्गम वन क्षेत्र में मिली हड्डियों से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बाघ की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। वन विभाग ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सभी आवश्यक जैविक नमूने सुरक्षित कर जांच के लिए भेज दिए हैं।

    गौरतलब है कि वर्ष 2026 में अब तक उमरिया जिले में 11 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

    मानसून गश्त में मिला कंकाल

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, 9 जुलाई को ताला परिक्षेत्र की मझखेता बीट में नियमित मानसूनी गश्त के दौरान वनकर्मियों को एक मांसाहारी वन्यजीव का कंकाल मिला। सूचना मिलते ही क्षेत्र संचालक, उप संचालक, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास का क्षेत्र खंगाला गया। साथ ही मेटल डिटेक्टर से भी जांच की गई, ताकि शिकार या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि से जुड़े साक्ष्य तलाशे जा सकें। प्रारंभिक परीक्षण में वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारियों ने कंकाल के बाघ का होने की संभावना जताई।

    प्रजाति और लिंग की पुष्टि जांच के बाद

    आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के कारण 9 जुलाई को कंकाल का परीक्षण नहीं हो सका। इसके बाद 10 जुलाई को एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और सहायक पशु चिकित्सा शल्यज्ञ ने परीक्षण किया। इस दौरान प्रजाति और लिंग की पुष्टि के लिए आवश्यक जैविक नमूने एकत्र किए गए तथा सभी साक्ष्यों का विधिवत दस्तावेजीकरण किया गया।

    खबरें और भी

    निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंकाल का अग्नि-दहन कर नियमानुसार विनष्टीकरण किया गया।

    यह भी पढ़ें- चित्रकूट में उफान पर मंदाकिनी, रामघाट की आठ सीढ़ियां जलमग्न; प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

    रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

    वन विभाग का कहना है कि केवल कंकाल मिलने के कारण बाघ की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है। अब डीएनए और अन्य जैविक नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे शिकार अथवा कोई अन्य वजह थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएंगे।