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    MP: लखनादौन नगर परिषद में 83 लाख का घोटाला, अध्यक्ष, पूर्व सीएमओ समेत 20 पर केस दर्ज, EOW ने की कार्रवाई

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 05:32 PM (IST)

    लखनादौन नगर परिषद में दुकानों के आवंटन में ₹83 लाख की अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। EOW जबलपुर ने नगर परिषद अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी, दो पूर्व सीएम ...और पढ़ें

    लखनादौन नगर परिषद में घोटाला (प्रतीकात्मक चित्र)

    लखनादौन नगर परिषद में घोटाला (प्रतीकात्मक चित्र)

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    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। सिवनी जिले के लखनादौन में नगर परिषद द्वारा निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर बने कॉम्प्लेक्स में नियमों को ताक पर रखकर दुकानों का आवंटन कर शासन को करीब 83 लाख रुपये की राजस्व हानि पहुंचाई गई। जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने नगर परिषद लखनादौन की अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी, दो पूर्व सीएमओ, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक, पीआईसी सदस्यों और 14 दुकानदारों सहित कुल 20 लोगों पर मामला दर्ज किया है।

    ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 120बी भादवि और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

    बिना पूरी रकम, बिना अनुबंध- फिर भी कब्जा

    • जांच में सामने आया कि नगर परिषद ने आठ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में कुल 75 दुकानों का निर्माण कर नीलामी कराई थी। नियमों के अनुसार 21 दिन में 25% राशि और शेष 120 दिन में पूरी राशि जमा कर अनुबंध किया जाना था, साथ ही मासिक किराया तय होना था।
    • लेकिन 24 अगस्त 2020 से 18 अक्टूबर 2024 के बीच पूरी नीलामी राशि जमा कराए बिना और बिना अनुबंध दुकानों का कब्जा दे दिया गया।
    • सत्यापन में 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों द्वारा करीब 79.82 लाख रुपये जमा न किए जाने और 2.88 लाख रुपये किराया वसूली न होने की पुष्टि हुई।

    आरक्षित दुकानें अनारक्षितों को दीं

    यह मामला जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत पर उजागर हुआ। आरोप है कि आरक्षित वर्ग के लिए तय दुकानों को सामान्य वर्ग को आवंटित कर नियमों का उल्लंघन किया गया।

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    जांच में यह भी सामने आया कि आरक्षित दुकान क्रमांक 7 को वैभव दुबे को बिना पुनः नीलामी आवंटित कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार तीन बार नीलामी विफल होने पर ही दुकान को अनारक्षित घोषित किया जा सकता है। पीआईसी बैठक में प्रस्ताव पारित कर लाभ पहुंचाने के आरोप भी दर्ज किए गए हैं।

    मिलीभगत से हुआ नुकसान

    ईओडब्ल्यू के अनुसार तत्कालीन सीएमओ गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीक, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक रवि गोल्हानी सहित अन्य आरोपियों पर पद के दुरुपयोग और आपसी मिलीभगत के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का आकलन है कि पूरे प्रकरण से शासन को करीब 83 लाख रुपये की क्षति हुई है।

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    मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।