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MP हाई कोर्ट में OBC आरक्षण पर नियमित सुनवाई शुरू, पहले चरण में आरक्षण बढ़ाने के विरुद्ध सुने जाएंगे तर्क

Updated: Mon, 27 Apr 2026 09:43 PM (GMT+05:30)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर नियमित सुनवाई शुरू हो गई है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ द्वारा पहले आरक्षण बढ़ाने के विरुद्ध तर्क सुने जाएंगे।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी जंग अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती नजर आ रही है। सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई शुरू हुई।

कोर्ट में सुनवाई का क्रम तय

करीब 86 याचिकाओं से जुड़े इस मामले में पहले दिन संक्षिप्त सुनवाई हुई, जो लगभग 35 मिनट चली। इस दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों से यह स्पष्ट कराया कि उन्हें अपनी-अपनी दलीलों के लिए कितना समय चाहिए। इसके बाद सुनवाई का क्रम भी तय कर दिया गया। सबसे पहले ओबीसी आरक्षण का विरोध करने वाले पक्ष की दलीलें सुनी जाएंगी, फिर राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी और अंत में आरक्षण के समर्थन में याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार सुबह 11 बजे से होगी, जहां विस्तृत बहस शुरू होने की संभावना है।

2019 से जारी है कानूनी लड़ाई

यह विवाद वर्ष 2019 में दायर उस याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई थी। इसके बाद पक्ष-विपक्ष में कई याचिकाएं दायर हुईं, जिससे मामला और जटिल हो गया।

सोमवार की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की, जबकि ओबीसी वर्ग की ओर से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और वरुण ठाकुर उपस्थित रहे। राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा, वहीं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराजन भी बहस के लिए शामिल हुए।

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सुप्रीम कोर्ट से लौटे मामले

गौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार ने इस मुद्दे से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करा लिया था। हालांकि, 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों को वापस हाईकोर्ट भेज दिया। इसके बाद से इस सुनवाई को लेकर प्रदेशभर में उत्सुकता बनी हुई थी। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस अहम मुद्दे पर कानूनी बहस और तेज होने की उम्मीद है।