विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

MP में एथेनॉल चावल घोटाले के बाद धान परिवहन में गड़बड़ी! हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, हर जिले में होगी जांच

Updated: Fri, 14 Aug 2026 09:32 PM (IST)

मध्य प्रदेश में एथेनॉल चावल घोटाले के बाद अब धान परिवहन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. जबलपुर कलेक्टर की सतर्कता से पकड़ा गया था घोटाला(

  2. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दिए जांच के सख्त आदेश।

  3. सभी जिलों के कलेक्टरों को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश में एथेनॉल के नाम पर फोर्टिफाइड चावल में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की जांच अभी जारी है और इसी बीच धान परिवहन में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। जबलपुर में पकड़ी गई गड़बड़ी के बाद अब इसके तार प्रदेश के कई जिलों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सभी जिलों में धान परिवहन की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जबलपुर से खुला मामला 

धान परिवहन में गड़बड़ी का मामला कुछ दिन पहले जबलपुर कलेक्टर की सतर्कता से सामने आया था। शुरुआती जांच में 22 जिलों में अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले को केवल एक जिले तक सीमित न रखते हुए प्रदेशव्यापी जांच की जरूरत महसूस की गई।

नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया कि जबलपुर में जिस तरह धान परिवहन में गड़बड़ी पकड़ी गई, उससे आशंका है कि इसी तरह की अनियमितताएं दूसरे जिलों में भी हो सकती हैं।

चार जिलों में कार्रवाई, लेकिन कोर्ट ने माना अपर्याप्त

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी में कुछ मामले दर्ज कर कार्रवाई की गई है, लेकिन प्रदेश स्तर पर व्यापक जांच और कार्रवाई अब तक नहीं हुई।

अधिवक्ता ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पहले ही 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए हैं। इससे स्पष्ट है कि धान परिवहन में गड़बड़ी का दायरा जबलपुर तक सीमित नहीं माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें- मंडला में वन विभाग का क्लर्क निकला करोड़पति, EOW के छापे में मिली ढाई करोड़ की संपत्ति

सभी कलेक्टरों को जांच के आदेश

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के सभी कलेक्टरों को धान परिवहन की जांच करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी जिले में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी और जांच की रिपोर्ट न्यायालय में पेश करनी होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि यदि जबलपुर कलेक्टर ने सतर्कता नहीं दिखाई होती तो धान परिवहन में कथित गड़बड़ी सामने नहीं आ पाती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि दूसरे जिलों के कलेक्टरों को भी अपने स्तर पर ऐसी अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई करनी चाहिए थी।

सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन और ईओडब्ल्यू से भी मांगी रिपोर्ट

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन से मामले में शपथपत्र पेश करने को कहा है। वहीं आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को भी जांच की वर्तमान स्थिति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब प्रदेश के सभी जिलों में होने वाली जांच से यह सामने आएगा कि धान परिवहन में कथित अनियमितता कितने बड़े स्तर पर हुई और इसमें कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं। हाई कोर्ट की निगरानी में होने वाली इस कार्रवाई से धान परिवहन व्यवस्था में गड़बड़ी के पूरे नेटवर्क के सामने आने की उम्मीद है।