प्रोबेशन कर्मचारियों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने वेतन कटौती पर लगाई रोक; 100% सैलरी व एरियर देने के निर्देश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि में कर्मचारियों को कम वेतन देने की सरकारी व्यवस्था को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने प्रोबेशनरों की वेतन कटौती पर लगाई रोक। (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
प्रोबेशन अवधि में कम वेतन देने की व्यवस्था अवैध।
नियमित प्रोबेशनरों को 100% वेतन पाने का अधिकार।
याचिकाकर्ता को पूरा वेतन और एरियर मिलेगा।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि के दौरान कर्मचारियों को 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की सरकारी व्यवस्था को अवैध करार देते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त प्रोबेशनर कर्मचारियों को भी पद के न्यूनतम वेतनमान के अनुसार 100 प्रतिशत वेतन पाने का अधिकार है।
अदालत ने दमोह निवासी अपेक्षा पाठक की याचिका स्वीकार करते हुए पांच अक्टूबर, 2023 के नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक-3 को निरस्त कर दिया। साथ ही राज्य शासन को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को प्रोबेशन अवधि का पूरा वेतन, सभी परिणामी लाभ और एरियर की गणना कर प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के 90 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए।
याचिकाकर्ता की यह दलील
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वैभव प्रवीण पांडे ने दलील दी कि नियुक्ति आदेश में शामिल विवादित शर्त सामान्य प्रशासन विभाग के 12 दिसंबर, 2019 के परिपत्र पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि इस परिपत्र को इंदौर खंडपीठ पहले ही दिल्लीराज भीलाला और विनीता तिवारी मामलों में विधि विरुद्ध घोषित कर चुकी है। उनका तर्क था कि समान कार्य करने वाले प्रोबेशनरों को कम वेतन देना संविधान में निहित 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत का उल्लंघन है।
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राज्य शासन ने सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र के आधार पर नियुक्ति आदेश का बचाव किया, लेकिन अदालत ने कहा कि इस मुद्दे का विधिक निस्तारण पहले ही हो चुका है। ऐसे में प्रोबेशन अवधि में कम वेतन देने का कोई तार्किक या कानूनी आधार नहीं बचता। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पूर्ण वेतन और समस्त वित्तीय लाभ देने के निर्देश जारी किए।