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11.94 करोड़ का मनी ट्रेल, फिर भी बड़े नाम जांच से बाहर! ऑनलाइन गेमिंग फर्जीवाड़े में MP हाई कोर्ट ने कटनी पुलिस पर उठाए गंभीर सवाल

Updated: Mon, 17 Aug 2026 05:49 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े 11.94 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल मामले में कटनी पुलिस की ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

HighLights

  1. MP हाई कोर्ट ने कटनी पुलिस जांच पर गंभीर टिप्पणी की।

  2. 11.94 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल की अनदेखी पर सवाल।

  3. डीजीपी को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। ऑनलाइन गेमिंग और करोड़ों रुपये के कथित फर्जी वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कटनी पुलिस की जांच पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि बैंक खातों में 11.94 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल का पता चलने के बावजूद उन लोगों से पूछताछ नहीं की गई, जिनके खातों में रकम पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, 17 अप्रैल 2026 से जेल में बंद आरोपित योगेश बजाज को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।

फर्म और बैंक खाते के इस्तेमाल पर उठे सवाल

मामला कटनी कोतवाली में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। आरोप है कि कटनी कंप्यूटर्स के कर्मचारी ओमप्रकाश के पहचान संबंधी दस्तावेज और चेक लेकर 'कटनी काम्प' नाम से फर्म और बैंक खाता खोला गया। बाद में इस खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किए जाने का आरोप सामने आया। पुलिस ने मामले में योगेश बजाज समेत अन्य लोगों को आरोपित बनाया था।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश बैंक रिकॉर्ड में ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित करीब 11.94 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ। यह रकम कटनी कंप्यूटर्स के मालिक विजय बहरवानी और उनके कर्मचारियों के बैंक खातों तक पहुंची थी।

चार्जशीट से पहले पूछताछ क्यों नहीं?

हाई कोर्ट ने जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी रकम का लेनदेन सामने आने के बावजूद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने से पहले न तो कटनी कंप्यूटर्स के मालिक का बयान दर्ज किया और न ही उन कर्मचारियों से पूछताछ की, जिनके खातों में बड़ी रकम पहुंची थी। अदालत ने इसे जांच की गंभीर खामी माना।

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब बैंक स्टेटमेंट पहले से ही जांच एजेंसी के पास मौजूद थे, तो मनी ट्रेल की समय रहते विस्तृत पड़ताल क्यों नहीं की गई और संबंधित लोगों से पूछताछ क्यों नहीं हुई।

पहले चार्जशीट, फिर आगे की जांच की अनुमति

अदालत ने पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी हैरानी जताई। कोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पहले चार्जशीट दाखिल की और उसके बाद आगे की जांच के लिए अनुमति मांगी। हाई कोर्ट ने इस प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और डीजीपी को मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ जांच में पुलिस की भूमिका की भी पड़ताल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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उपलब्ध जांच सामग्री और योगेश बजाज की भूमिका एवं हिरासत की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।