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    कोर्टरूम में भ्रूण लाने पर MP हाई कोर्ट का फूटा गुस्सा, याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 08:09 AM (IST)

    मप्र हाई कोर्ट ने कोर्ट रूम में शिशु भ्रूण लाने वाले याचिकाकर्ता पर कड़ी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने इसे अनुचित और अवैधानिक बत ...और पढ़ें

    मप्र हाईकोर्ट भवन (प्रतीकात्मक चित्र)

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    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मप्र हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कोर्ट रूम में शिशु भ्रूण लाने वाले याचिकाकर्ता की हरकत पर गुरुवार को सुनवाई को दौरान कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अपनी टिप्पणी में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा कोर्टरूम में गर्भपात वाले शिशु भ्रूण को लाना सर्वथा अनुचित और अवैधानिक है।

    दरअसल, शिशु भ्रूण, जो इंसान का शरीर है, उसे बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के नियमों के अनुरूप ही हैंडल और डिस्पोज किया जाना चाहिए। कोर्ट रूम जैसे गरिमामय सार्वजनिक स्थल पर ऐसे अवशेषों को बिना अनुमति के ले जाना और प्रदर्शित करना न सिर्फ नियत प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि प्रथमदृष्ट्या यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत सजा के रूप में मनुष्य के शव का अपमान करने जैसा है। ऐसा व्यवहार कोर्ट की मर्यादा और गरिमा को भी ठेस पहुंचा सकता है।

    उक्त तल्ख टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि वह भविष्य में इस कोर्ट या किसी दूसरे ज्यूडिशियल फोरम या पब्लिक अथारिटी के समक्ष ऐसा कृत्य न करे। यह कृत्य न्यायिक कार्रवाई की गरिमा और काम करने में रुकावट डालने की कोशिश है, जिसे कदापि बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

    यह है मामला

    उल्लेखनीय है कि रीवा निवासी दयाशंकर पांडे विगत नौ मार्च को शिशु का भ्रूण लेकर पहुंच गया था। दयाशंकर का आरोप था कि वह महानद्दा स्थित मारुति शोरूम में कार्य करता था। उस दौरान उसने 200 करोड़ रुपये का घपला उजागर किया, जिस कारण उस पर लगातार हमले हो रहे हैं।

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    दयाशंकर ने खुद पैरवी करते हुए कहा कि शोरूम से 200 करोड़ रुपये की वसूली की जाए और उसे 82 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा और मारुति कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने दलील दी कि याचिका पूरी तरह से मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने पुलिस अधिकारियों के सामने पेश की गई कोई भी लिखित शिकायत याचिका के साथ रिकॉर्ड में प्रस्तुत नहीं की है।