'ओला-उबर दो मिनट में पहुंच जाती हैं, तो एंबुलेंस क्यों नहीं?' हाईवे पर अवैध कट-प्वाइंट्स को लेकर हाईकोर्ट सख्त
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने अवैध कट-प्वाइंट्स को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने एंबुलेंस की देरी और सड़क हादसों के बढ़ते खतरे का हवाला देते हुए इन कट-प्वाइंट्स को हटाने की मांग की है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने अवैध कट-प्वाइंट्स को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इस गंभीर मामले में केंद्र और राज्य के संबंधित विभागों से जवाब-तलब किया है।
कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव और लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
एंबुलेंस में देरी पर उठे सवाल
जनहित याचिकाकर्ता, डिंडौरी निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी महावीर सिंह ने स्वयं कोर्ट में पक्ष रखते हुए चौंकाने वाला तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जब ओला-उबर जैसी सेवाएं दो मिनट के भीतर उपलब्ध हो जाती हैं, तो आपात स्थिति में एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंच पाती?
उन्होंने विशेष रूप से भोपाल-जबलपुर हाईवे का उदाहरण देते हुए बताया कि डिवाइडर तोड़कर करीब 300 अवैध कट प्वाइंट बना दिए गए हैं। इन कट-प्वाइंट्स के कारण न केवल वाहनों की गति प्रभावित होती है, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
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जनहित याचिका पर गंभीरता
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अवैध कट-प्वाइंट्स के चलते एंबुलेंस की समय पर पहुंच बाधित होती है, जो सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में इस जनहित याचिका को गंभीरता से लेते हुए ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। जवाब मिलने के बाद कोर्ट आगे की कार्रवाई और आवश्यक दिशा-निर्देश तय करेगा।
