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'बिना पढ़ाई-प्रैक्टिकल की डिग्री मरीजों के लिए खतरनाक', नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट की दो टूक; 130 कॉलेजों को राहत नहीं

Updated: Tue, 18 Aug 2026 02:28 PM (IST)

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े में 2395 स्थानांतरित GNM विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम जारी करने की अनुमति ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 2395 GNM विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम जारी करने की अनुमति मिली।

  2. अपात्र कॉलेजों से पात्र संस्थानों में छात्रों का स्थानांतरण किया गया।

  3. 130 नर्सिंग कॉलेजों की अंतरिम अर्जियां हाईकोर्ट ने खारिज कीं।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाई कोर्ट ने विद्यार्थियों के हित में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने अपात्र (अनसूटेबल) नर्सिंग कॉलेजों से पात्र (सूटेबल) संस्थानों में स्थानांतरित किए जा चुके 2395 जीएनएम विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम जारी करने की अनुमति दे दी है। साथ ही पढ़ाई और प्रायोगिक प्रशिक्षण में हुई कमी को अतिरिक्त कक्षाओं और दोहरी पाली के जरिए पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि नर्सिंग शिक्षा में सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को पर्याप्त सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलना भी जरूरी है।

4475 विद्यार्थियों में से 2395 का हो चुका स्थानांतरण

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि अपात्र कॉलेजों में पढ़ रहे कुल 4475 विद्यार्थियों में से 2395 को पात्र कॉलेजों में स्थानांतरित किया जा चुका है। शेष 2080 विद्यार्थियों को भी जल्द ही पात्र संस्थानों में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

डिग्री से ज्यादा जरूरी है व्यावहारिक प्रशिक्षण

लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा और विशाल बघेल ने विद्यार्थियों के स्थानांतरण पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि जिन संस्थानों में विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, वहां पर्याप्त फैकल्टी और जरूरी अधोसंरचना उपलब्ध नहीं थी।

इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि बिना पर्याप्त कक्षाओं और प्रायोगिक प्रशिक्षण के नर्सिंग की डिग्री हासिल करना मरीजों और समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि नर्सिंग में डिग्री से अधिक महत्वपूर्ण विद्यार्थियों का वास्तविक प्रशिक्षण और व्यावहारिक दक्षता है।

130 कॉलेजों को नहीं मिली राहत

हाई कोर्ट ने प्रेस्टन कॉलेज समेत 130 नर्सिंग संस्थानों से जुड़ी अंतरिम अर्जियां भी खारिज कर दीं। इन संस्थानों ने सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत का हवाला देते हुए परीक्षा परिणाम जारी करने और विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश देने की अनुमति मांगी थी।

हालांकि, कोर्ट ने गंभीर आरोपों का सामना कर रहे संस्थानों के प्रति किसी तरह की सहानुभूति दिखाने से इंकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कॉलेज प्रमोटरों से यह भी पूछा गया कि क्या वे सीबीआई जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई भी प्रमोटर आगे नहीं आया।

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डमी विद्यार्थियों पर रोक के लिए प्रवेश परीक्षा का सुझाव

नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया में फर्जीवाड़े और डमी विद्यार्थियों की संभावना रोकने के लिए ANM-GNM पाठ्यक्रमों में सीधे काउंसलिंग के बजाय प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का सुझाव भी सामने आया। हाई कोर्ट ने सुझाव को उचित मानते हुए राज्य सरकार और नर्सिंग काउंसिल को इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

2 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी। इस दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को मामले से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।