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    MP में सागौन क्रांति की तैयारी: टिश्यू कल्चर तकनीक से लगेंगे 40 हजार पौधे, किसानों को होगा बड़ा फायदा

    By Sunil DahiyaEdited By: Ravindra Soni
    Updated: Wed, 17 Jun 2026 05:47 PM (IST)

    मध्य प्रदेश वन विभाग और टीएफआरआई जबलपुर के सहयोग से 40 हजार क्लोनिकल सागौन के पौधे रोपे जाएंगे। यह पहल हरित आवरण बढ़ाएगी और किसानों को उच्च गुणवत्ता व ...और पढ़ें

    सागौन के पेड़।

    सागौन के पेड़।

    HighLights

    1. 40 हजार क्लोनिकल सागौन पौधे लगाए जाएंगे।

    2. टिश्यू कल्चर तकनीक से तेजी से बढ़ेंगे सागौन वृक्ष।

    3. किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी से होगा लाभ।

    सुनील दाहिया, जबलपुर। मध्य प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता वाली सागौन लकड़ी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वन विभाग एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू करने जा रहा है। उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान (टीएफआरआई), जबलपुर के सहयोग से प्रदेश में क्लोनिकल सागौन (टिश्यू कल्चर) के 40 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल वन संपदा को समृद्ध करेगी, बल्कि किसानों के लिए भी आय का नया अवसर लेकर आएगी।

    वन विभाग ने इस योजना को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए कटनी, मंडला और जबलपुर सहित आठ वन संभागों के 18 जिलों का चयन किया गया है। जबलपुर जिले के कुंडम क्षेत्र में पौधारोपण अभियान 22 जुलाई से शुरू होगा।

    कम समय में तैयार होगी उच्च गुणवत्ता की लकड़ी

    टीएफआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार किए गए सागौन पौधे पारंपरिक पौधों की तुलना में अधिक तेज़ी से विकसित होते हैं। इनसे तैयार होने वाले वृक्ष सीधे, लंबे और बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं, जिससे बाजार में उनकी मांग और कीमत दोनों अधिक रहती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, क्लोनिकल सागौन के वृक्ष लगभग 20 वर्षों में परिपक्व हो जाते हैं, जबकि बीज से तैयार पारंपरिक सागौन को पूर्ण विकसित होने में 60 से 120 वर्ष तक का समय लग सकता है। यही वजह है कि टिंबर उद्योग में ऐसे वृक्षों को अधिक पसंद किया जाता है।

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    किसानों को भी मिलेगा लाभ

    वन विभाग का उद्देश्य केवल वन क्षेत्र बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को भी आधुनिक वानिकी तकनीकों से जोड़ना है। विभाग का मानना है कि यदि किसान अपने खेतों में क्लोनिकल सागौन का रोपण करते हैं, तो कम समय में बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

    ऐसे तैयार होते हैं टिश्यू कल्चर पौधे

    टिश्यू कल्चर पद्धति में चयनित श्रेष्ठ सागौन वृक्षों की शाखाओं से पौध सामग्री ली जाती है। वैज्ञानिक उपचार और नियंत्रित वातावरण में इन्हें विकसित किया जाता है। पालीटनल और विशेष प्रयोगशाला प्रक्रियाओं के जरिए तैयार किए गए पौधे मूल वृक्ष के समान गुणों वाले होते हैं, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन में एकरूपता बनी रहती है।

    वन विभाग और टीएफआरआई को उम्मीद है कि यह पहल प्रदेश में टिकाऊ वानिकी को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों और वन क्षेत्र दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी।

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    इन जिलों में होगा रोपण

    - जबलपुर, कुंडम,
    - कटनी
    - मंडला
    - सतना
    - मैहर
    - पूर्वी छिंदवाड़ा
    - पश्चिमी छिंदवाड़ा
    - दक्षिणी पन्ना
    - सिंगरौली
    - नरसिंहपुर
    - सिवनी
    - दक्षिणी सागर
    - नर्मदापुरम
    - उत्तरी बैतूल
    - दक्षिणी बैतूल
    - रायेसन
    - सिहोर
    -छतरपुर
    -देवास

    मुख्यालय द्वारा टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार 40 हजार क्लोनिकल सागौन का पौधारोपण जबलपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में किया जाना है। टीएफआरआई के सहयोग से तैयार पौधों का रोपण कुंडम में किया जाएगा। इसके पूर्व संबंधितों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
    - पुनीत सोनकर, वन मंडल अधिकारी, जबलपुर