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    रेलवे टेक्नीशियन भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा : कोचिंग संचालक सॉल्वर को परीक्षा में बैठाकर पाई नौकरी, CBI ने मुंगेर से दोनों को पकड़ा

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 09:12 PM (GMT+05:30)

    बिहार के मुकेश कुमार ने नौकरी पाने के लिए कोचिंग संचालक रंजीत कुमार को 'सॉल्वर' बनाकर परीक्षा दिलाई। बायोमेट्रिक सत्यापन में धोखाधड़ी पकड़ी गई, जिसके ...और पढ़ें

    दो आरोपित गिरफ्तार (प्रतीकात्मक चित्र)

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    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। रेलवे में नौकरी पाने की चाहत में ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने भर्ती प्रक्रिया की सख्ती पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार के मुंगेर निवासी मुकेश कुमार ने टेक्नीशियन पद हासिल करने के लिए खुद परीक्षा देने के बजाय कोचिंग संचालक रंजीत कुमार को “साल्वर” बनाकर बैठाया। बायोमेट्रिक सत्यापन में जब भंडाफोड़ हुआ तो मुकेश नौकरी से गायब हो गया। जांच के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने रविवार को दोनों को मुंगेर से गिरफ्तार कर सोमवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    परीक्षा से ज्वाइनिंग तक चला खेल

    जानकारी के अनुसार, रेलवे की प्रारंभिक परीक्षा दिसंबर 2024 में पटना में हुई थी। इस परीक्षा में मुकेश की जगह रंजीत परीक्षार्थी बनकर शामिल हुआ। इसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन और मेडिकल जांच में भी रंजीत ही मुकेश बनकर उपस्थित होता रहा। सभी चरणों में “सफल” होने के बाद 12 जुलाई 2025 को रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र लेने मुकेश खुद पहुंचा। सितंबर 2025 में उसने पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत सेक्शन इंजीनियर कार्यालय में ज्वाइनिंग कर ली।

    पुन: बायोमेट्रिक में फंसा

    अक्टूबर 2025 में मुकेश प्रयागराज में विभागीय प्रशिक्षण में शामिल हुआ और इसके बाद जबलपुर रेल मंडल के दमोह व सागर में करीब पांच महीने तक पदस्थ रहा। रेलवे में नई भर्ती के एक वर्ष के भीतर पुनः बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होता है। 14 नवंबर 2025 को जब जबलपुर में दोबारा बायोमेट्रिक लिया गया, तो अंगूठे के निशान और चेहरे का मिलान नहीं हुआ। संदेह गहराते ही मुकेश बिना सूचना नौकरी छोड़कर फरार हो गया। रेलवे की शिकायत पर 2 दिसंबर 2025 को CBI ने मामला दर्ज किया।

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    छह लाख में तय हुई थी डील

    CBI जांच में सामने आया कि स्नातक मुकेश ने पड़ोस में रहने वाले कोचिंग संचालक रंजीत को छह लाख रुपये नकद का लालच दिया था। सौदा तय हुआ कि परीक्षा से लेकर मेडिकल तक रंजीत ही उसकी जगह सब कुछ करेगा। इसी के तहत वह मेडिकल के लिए कोटा तक गया। दोनों ने इंटरनेट की मदद से चेहरों को मिलाकर एक कॉमन फोटो भी तैयार कराई, ताकि पहचान में शक न हो। जांच एजेंसी के मुताबिक, रंजीत पढ़ाई में तेज था और कई वर्षों से मुंगेर में कोचिंग चला रहा था।

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    CBI अब यह भी खंगाल रही है कि इस फर्जीवाड़े में किसी और की भूमिका तो नहीं रही और भर्ती प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा तंत्र में कहां चूक हुई।