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    धोखे से जंगल में बुलाकर तीन युवकों को वाहन समेत जिंदा जलाया... सिवनी ट्रिपल मर्डर केस में दो सगे भाइयों समेत चार को उम्रकैद

    Updated: Tue, 03 Mar 2026 07:05 PM (IST)

    सिवनी जिले में 2015 के तिहरे हत्याकांड में जिला न्यायालय ने चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रेम प्रसंग के चलते तीन युवकों को बोलेरो सह ...और पढ़ें

    आरोपितों ने बोलेरो पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी, जिससे उसमें सवार तीन युवक भी जिंदा जल गए थे। (फाइल फोटो)

    आरोपितों ने बोलेरो पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी, जिससे उसमें सवार तीन युवक भी जिंदा जल गए थे। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सिवनी तिहरे हत्याकांड में चार दोषियों को उम्रकैद की सजा।

    2. प्रेम प्रसंग के चलते तीन युवकों को जिंदा जलाया गया था।

    3. मोबाइल डेटा और वैज्ञानिक साक्ष्य बने फैसले का आधार।

    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में वर्ष 2015 में हुए सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड में जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रेम प्रसंग के चलते बोलेरो वाहन सहित तीन युवकों को जिंदा जलाकर मारने के मामले में चार आरोपितों को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है। दोषियों में सगे भाई भी शामिल हैं।

    प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लक्ष्मण कुमार वर्मा की अदालत ने 27 फरवरी को 75 पृष्ठों के विस्तृत निर्णय में आरोपितों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 34, 435 और 201 के तहत दोषी ठहराया। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक नेतराम चौरसिया ने सशक्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए।

    जंगल में रची गई थी साजिश

    घटना 8 जनवरी 2015 की रात कुरई थाना क्षेत्र अंतर्गत धोबीटोला माल (पीपरवानी) जंगल में हुई थी। बोलेरो (एमपी 10-सीए 9999) में सवार राजेश नागोत्रा (28), दीपक भंवरे (23) और निहाल सिंगोर (18) को पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर मिट्टी का तेल और पेट्रोल डालकर वाहन सहित जिंदा जला दिया गया। अगले दिन जली हुई गाड़ी में तीनों के शव मिलने पर सनसनी फैल गई थी।

    प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह

    अभियोजन के अनुसार, मृतक दीपक का एक युवती से प्रेम संबंध था। इससे नाराज आरोपितों ने ‘झूठी शान’ में हत्या की साजिश रची। युवती के मोबाइल से संदेश भेजकर तीनों युवकों को सुनसान जंगल में बुलाया गया, जहां पहले से घात लगाए बैठे आरोपितों ने वारदात को अंजाम दिया।

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    मामले में मोबाइल डेटा, वैज्ञानिक साक्ष्य और जब्त हथियार (तलवार, लाठियां) अहम साबित हुए। न्यायालय ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपितों को दोषी पाया।

    दोषियों को आजीवन कारावास के साथ पांच वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 11 वर्ष बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।