बाघ के हमले में आदिवासी अधेड़ की मौत, उमरिया के जंगल में मिला क्षत-विक्षत शव
उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में महुआ बीनने गए एक आदिवासी व्यक्ति को बाघ ने मार डाला। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतक के परिवार के लिए मुआवजे और रोजगार की मांग की है।

बाघ ने किया आदिवासी का शिकार (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जंगल में महुआ बीनने गए एक आदिवासी व्यक्ति पर बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना रविवार दोपहर पनपथा कोर रेंज के चंसुरा बीट क्षेत्र में हुई।
महुआ बीनते वक्त हुआ हमला
जानकारी के मुताबिक, कुदरी गांव निवासी 46 वर्षीय रज्जू कोल महुआ के सूखे फूल बीनने के लिए रेतहा नाला के पास जंगल में गए थे। इसी दौरान क्षेत्र में घूम रहे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमला इतना घातक था कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
शव के हिस्से को नोच ले गया जंगली जानवर
वन विभाग के अनुसार, घटना के बाद मृतक के शरीर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त पाए गए, जिससे अंदेशा है कि बाघ या अन्य हिंसक वन्यजीव ने शव को नोच लिया था। सूचना मिलते ही वन अमला, पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। बाद में सहमति के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अमरपुर अस्पताल भेजा गया।
लापरवाही के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घटना स्थल के पास वन विभाग का कैंप मौजूद है, लेकिन वहां पर्याप्त निगरानी नहीं थी। उनका आरोप है कि यदि समय पर विभागीय कर्मी सक्रिय होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रज्जू कोल की मौत के बाद उनके परिवार पर संकट गहरा गया है। जनपद सदस्य रोशनी सिंह ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय जंगल पर निर्भर है, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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मुआवजा और रोजगार की मांग
उन्होंने मांग की है कि मृतक के परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता दी जाए और एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही बच्चों की शिक्षा और परिवार के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज दिया जाए।
हालांकि, नियमानुसार करीब 8 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है, लेकिन परिजनों का कहना है कि परिवार के मुखिया की कमी को केवल मुआवजे से पूरा नहीं किया जा सकता।
