महाराष्ट्र में दाही-हांडी में गिरने के बाद 17 साल से बिस्तर पर बेटा, मां ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
भिवंडी में 2009 के दही-हांडी हादसे में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद नागेश भोईर 17 साल से बिस्तर पर हैं।

दाही-हांडी में गिरने के बाद 17 साल से बिस्तर पर हैं नागेश।
HighLights
2009 में दही-हांडी हादसे में नागेश भोईर घायल हुए।
रीढ़ की हड्डी में चोट से 17 साल से बिस्तर पर।
मां ने मुख्यमंत्री से मासिक इलाज खर्च की गुहार लगाई।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के भिवंडी में नागेश भोईर को हर जन्माष्टमी पर दही-हांडी में 'गोविंदा' बनकर हिस्सा लेना बहुत पसंद था। 'गोविंदा आला रे' के नारों के बीच दही की मटकी फोड़ने के लिए इंसानी पिरामिड पर चढ़ना उन्हें बहुत रोमांचक लगता था।
इसी उत्साह के साथ 2009 में वह भिवंडी में एक इंसानी पिरामिड पर चढ़े। तभी उनका पैर फिसल गया। वह बहुत बुरी तरह नीचे गिरे और समय उनकी उम्र केवल 24 साल थी। उस हादसे को 17 साल बीच चुके हैं। अब 41 साल के हो चुके नागेश तब से अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे हैं।
नागेश की रीढ़ की हड्डी में लगी गंभीर चोट
इस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। आज, उनका कमजोर शरीर बिस्तर या व्हीलचेयर तक की सीमित है, उनकी जिंदगी हमेशा के लिए उस दही-हांडी वाले हादसे से पहले और बाद में बट गई है। लेकिन उस घटना ने सिर्फ नागेश की जिंदगी ही नहीं बदली, बल्कि पूरे परिवार को सालों तक भावनात्मक दर्द और आर्थिक तंगी में धकेल दिया।

टूटे वादे, नाकाफी मदद
इन सालों में कई लोगों ने मदद का वादा किया और कुछ ने मदद के हाथ भी बढ़ाया, लेकिन नागेश के लगातार चल रहे इलाज का खर्च परिवार की क्षमता से कहीं ज्यादा हो गया है। नागेश अपने बूढ़े माता-पिता और बड़ी बहन के साथ रहते हैं। उनके पिता, जो कभी प्राइवेट सेक्टर की नौकरी से परिवार का खर्च चलाते थे, अब रिटायर हो चुके हैं।
गोविंदाओं के लिए नागेश का संदेश
नागेश ने उन लोगों को संदेश दिया है जो दही-हांडी के जश्न में हिस्सा लेते हैं। उनकी अपील है कि जश्न मनाएं, मुकाबला करें और इंसानी पिरामिड बनाए, लेकिन याद रखें कि यह एक खेल है और अपनी जान जोखिम में न डाले। जरा सी चूक और बड़ा हादसा हो सकता है, जो न केवल गोविंदा पर बल्कि पूरे परिवार पर असर डालती है।
मुख्यमंत्री से एक मां की अपील
नागेश की मां के लिए, पिछले 17 साल अपने बेटे को उस हादसे के नतीजों से जूझते हुए देखने में बीते हैं, जो तब हुआ था जब वह सिर्फ 24 साल का था। अब, इलाज के लगातार खर्चों को उठाने में हो रही मुश्किलों के बीच, उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भावुक अपील की है।
उन्होनें कहा कि हमें एक बार मिलने वाली आर्थिक मदद नहीं चाहिए। हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि उसके हर महीने होने वाले इलाज खर्च के लिए कोई स्थायी इंतजाम किया जाए।
यह भी पढ़ें- श्रीकृष्ण की बाल लीला से जुड़ा है दही हांडी उत्सव, जानिए कैसे शुरू हुई यह परंपरा
