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श्रीकृष्ण की बाल लीला से जुड़ा है दही हांडी उत्सव, जानिए कैसे शुरू हुई यह परंपरा

Published: Tue, 01 Sep 2026 02:27 PM (IST)

दही हांडी उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है, जो जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है। यह ...और पढ़ें

दही हांडी उत्सव का इतिहास (Picture Credit: AI Generated)

 दही हांडी उत्सव का इतिहास (Picture Credit: AI Generated) 

HighLights

  1. जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है दही हांडी उत्सव।

  2. भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला से जुड़ा है।

  3. मानव पिरामिड बनाकर दही की मटकी फोड़ने की परंपरा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह दिन लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। जन्माष्टमी के अगले दिन यानी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर दही हांडी उत्सव मनाया जाता है।

इस उत्सव को उत्साह और उल्लास के साथ भगवान श्रीकृष्ण की लीला के रूप में मनाया जाता है। इस खास अवसर पर दही हांडी को फोड़ा जाता है। इस दिन देशभर में खास रौनक देखने को मिलती है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर दही हांडी उत्सव की शुरुआत कैसे हुई। आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से इसके पीछे की वजह के बारे में बताते हैं।

dahi handi utsav 2026

(Picture Credit: AI Generated) 

कैसे हुई दही हांडी उत्सव की शुरुआत?

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को माखन अधिक प्रिय था। इसलिए प्रभु के भोग में माखन को शामिल करने का विशेष महत्व है। बचपन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ गोपियों के घर जाकर माखन और दही खाया करते थे। इसी वजह से लड्डू गोपाल को माखन चोर के नाम से पुकारा जाता है।

गोपियां भगवान श्रीकृष्ण से माखन और दही को बचाने के लिए मटकी को ऊंचे स्थान पर लटकाने लगीं, लेकिन इसके बाद भी भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं की मदद से माखन और दही चुराकर खाया करते थे। इसी लीला से दही हांडी उत्सव की परंपरा की शुरुआत हुई। इस उत्सव को हर साल धूमधाम के साथ मनाया जाता है। श्रीकृष्ण की इस बाल लीला का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में मिलता है। 

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कैसे मनाया जाता है दही हांडी उत्सव?

जन्माष्टमी के अगले दिन मिट्टी की मटकी में दही और माखन भरकर उसे काफी ऊंचाई पर लटकाया जाता है। इसके बाद युवाओं की टोलियां एक मानव पिरामिड बनाती हैं और पिरामिड के सबसे ऊपर पहुंचकर हांडी को तोड़ा जाता है। मटकी फूटते ही उसमें रखा दही और माखन नीचे खड़े गोविंदाओं पर गिरता है, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस दौरान ढोल-नगाड़े बजाए जाते हैं और श्रीकृष्ण के भजन चलाए जाते हैं।

कब है दही हांडी उत्सव (Dahi Handi Utsav 2026)

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा और दही हांडी उत्सव इसके अगले दिन यानी 5 सितंबर को मनाया जाएगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।