महाराष्ट्र में 5 वर्षों में 36,000 से अधिक निजी कंपनियां हुईं बंद, विपक्ष ने भ्रष्टाचार और सरकारी हस्तक्षेप को बताया जिम्मेदार
महाराष्ट्र में पिछले पांच वित्तीय वर्षों में 36,000 से अधिक निजी कंपनियां बंद हो गईं, जिस पर विपक्ष ने भ्रष्टाचार और सरकारी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया है।

HighLights
महाराष्ट्र में 5 साल में 36,000 से अधिक कंपनियां बंद।
विपक्ष ने भ्रष्टाचार, सरकारी हस्तक्षेप को बताया मुख्य कारण।
मुंबई, पुणे, ठाणे में सर्वाधिक कंपनी बंद हुईं।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान महाराष्ट्र में 36,000 से अधिक निजी कंपनियां बंद हो चुकी हैं, जिनमें लिक्विडेशन, डिजोल्यूशन या नाम हटाए जाने के मामले शामिल हैं। इस खुलासे के बाद राज्य के विपक्षी दलों ने वर्तमान सरकार के खिलाफ हमला बोला है।
विपक्ष का आरोप है कि अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप, व्यापक भ्रष्टाचार और व्यवसाय के लिए प्रतिकूल माहौल के कारण औद्योगिक गतिविधियां महाराष्ट्र से बाहर स्थानांतरित हो रही हैं।
यह जानकारी कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा 10 अगस्त को शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसद राजाभाऊ वाजे द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में संसद में साझा की गई थी।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजाभाऊ वाजे ने कहा कि बिजनेस सर्विसेज क्षेत्र में 14,000 से अधिक और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में लगभग 6,500 कंपनियों का बंद होना बेहद चिंताजनक है, क्योंकि ये दोनों ही क्षेत्र राज्य में सबसे अधिक रोजगार पैदा करते हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप से बढ़ा भ्रष्टाचार
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार राज्य के आर्थिक विकास को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नए व्यवसायों और औद्योगिक इकाइयों के स्थान चयन में सरकार के बढ़ते दखल से आर्थिक वृद्धि प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कंपनियां बंद हो रही हैं।
सावंत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने युवाओं को स्वरोजगार अपनाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अपने आंकड़े यह साबित करते हैं कि भाजपा नेतृत्व भागवत के संदेशों पर अमल नहीं कर रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र अब पड़ोसी राज्य कर्नाटक से पिछड़ रहा है।
बंद हुई कंपनियों का क्षेत्रवार डिटेल्स
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों में बंद हुई कुल 36,211 निजी कंपनियों में से सबसे बड़ा हिस्सा बिजनेस सर्विसेज क्षेत्र का रहा, जिसमें 14,613 कंपनियां बंद हुईं। इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और क्वैरीइंग क्षेत्र की 6,582 कंपनियां तथा ट्रेडिंग क्षेत्र की 4,196 कंपनियां बंद हुईं।
इसके अलावा, कम्युनिटी, पर्सनल एवं सोशल सर्विसेज की 3,361 कंपनियां, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की 2,356 कंपनियां, स्टोरेज एवं कम्युनिकेशंस की 1,336 कंपनियां, और कृषि तथा उससे जुड़ी गतिविधियों की 1,178 कंपनियां बंद हो गईं।
रियल एस्टेट एवं रेंटिंग क्षेत्र की 1,149 कंपनियां, फाइनेंस क्षेत्र की 1,012 कंपनियां, बिजली, गैस एवं जल आपूर्ति की 387 कंपनियां और बीमा क्षेत्र की 41 कंपनियां भी इस अवधि में बंद हुईं।
जिलावार आंकड़ों में मुंबई, पुणे और ठाणे सबसे आगे
भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो राज्य की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में सबसे अधिक 12,009 कंपनियां बंद हुईं। इसके बाद पुणे में 6,433 और ठाणे में 4,704 कंपनियों का परिचालन समाप्त हुआ। ये तीनों जिले मिलकर राज्य में बंद हुई कुल कंपनियों का लगभग 64 प्रतिशत यानी 23,146 कंपनियां हिस्सा बनाते हैं।
अन्य जिलों में नागपुर में 1,478, नासिक में 840, रायगढ़ में 822, औरंगाबाद में 654, कोल्हापुर में 429, अहमदनगर में 308, सोलापुर में 262, सांगली में 247, जलगांव में 215, सातारा में 196, बांद्रा सबअर्बन में 172, नांदेड़ में 169, लातूर में 163 और अमरावती में 151 कंपनियां बंद हुईं। इसके अतिरिक्त 'अन्य' श्रेणी में 5,636 कंपनियों के बंद होने की बात कही गई है।
श्रमिकों के पुनर्वास पर केंद्र की प्रतिक्रिया
सांसद राजाभाऊ वाजे ने इस बात पर चिंता जताई कि केंद्र सरकार के पास यह आंकड़े तो उपलब्ध हैं कि कितनी कंपनियां बंद हुईं, लेकिन इस वजह से कितने कर्मचारी और मजदूर प्रभावित हुए, इसका कोई आधिकारिक डेटा नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि नासिक जिले में एक स्थानीय कंपनी से हटाए जाने के बाद पिछले महीने एक मजदूर ने आत्महत्या कर ली थी।
संसद में अपने लिखित उत्तर में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि निजी कंपनियों के परिचालन बंद होने से प्रभावित होने वाले श्रमिकों का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।
इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत समाधान प्रक्रिया में जाने वाली कंपनियों के मामले में श्रमिकों के दावों का निपटारा न्यायिक प्राधिकरण के आदेशों के अनुसार होता है।
इसी तरह, कंपनियों के लिक्विडेशन के मामलों में लिक्विडेटर निधि की उपलब्धता और वैधानिक प्राथमिकताओं के आधार पर कर्मचारियों के बकाए का भुगतान करता है।
सरकार ने यह भी कहा कि प्रभावित श्रमिकों के लिए किसी विशेष पुनर्वास पैकेज या पिछड़े जिलों में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए दी जाने वाली कर छूट का कोई केंद्रीय डेटा नहीं रखा जाता है।
राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष
इससे पूर्व, महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार द्वारा आर्थिक सुस्ती और अन्य कारणों से 12,000 से अधिक छोटी औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से संबंधित पूछे गए सवाल के जवाब में राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा था कि यह दावा आंशिक रूप से सत्य है।

