एक गलत क्लिक और उड़ गए 3.48 करोड़, मुंबई में कंपनियों को कंगाल बना रहा साइबर ठगों का यह नया 'खतरनाक खेल'
मुंबई में साइबर अपराधियों ने कंपनियों को ठगने का नया तरीका अपनाया है, जिसमें कर्मचारियों के फोन हैक कर 3.48 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
साइबर ठगों ने कंपनियों से 3.48 करोड़ रुपये ठगे।
कर्मचारियों के फोन हैक कर रिमोट एक्सेस से की ठगी।
एमडी/डायरेक्टर बनकर व्हाट्सएप पर दिए फर्जी आदेश।
डिजिटल डेस्क, मुंबई: मुंबई में साइबर अपराधियों ने कंपनियों को ठगने का एक बेहद शातिर और नया तरीका निकाला है। इस नए तरीके में ठग न सिर्फ झूठ बोलते हैं, बल्कि एक लिंक के जरिए कर्मचारियों के मोबाइल फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं। हाल ही में मुंबई की दो बड़ी कंपनियां इस नए जाल में फंस गईं और उनके अकाउंटेंट्स की एक गलती की वजह से दोनों कंपनियों को कुल 3.48 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
पहला मामला- एल्युमिनियम कंपनी को 1.98 करोड़ का चटका
बता दें कि पहली घटना एक एल्युमिनियम सप्लाई और ट्रेडिंग कंपनी की है, जिसे 1.98 करोड़ रुपये का चूना लगा। मामला है 11 जून की शाम का। जब कंपनी की महिला अकाउंटेंट के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से एक 'जिप फ़ाइल' आई। अकाउंटेंट ने बिना सोचे-समझे उस फाइल को खोल दिया।
फाइल खुलते ही ठग को अकाउंटेंट के फोन का पूरा रिमोट एक्सेस मिल गया। ठग ने चुपके से अकाउंटेंट की कॉन्टैक्ट लिस्ट बदल दी। उसने कंपनी के असली मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) का नंबर ब्लॉक कर दिया और अपने नंबर को 'एमडी' के नाम से सेव कर दिया।
व्हाट्सएप पर एमडी बनकर दिया आदेश
एमडी का नंबर बदलने के बाद ठग ने एमडी बनकर व्हाट्सएप पर चैट शुरू की और अकाउंटेंट से कहा कि तुरंत गुड़गांव के एक बैंक खाते में 1.98 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएं। अकाउंटेंट ने इसे असली एमडी का आदेश समझा और पैसे भेज दिए। बाद में जब ठगी का पता चला, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर ट्रांसफर हुए पैसों में से 87.04 लाख रुपये फ्रीज करवा लिए।
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दूसरा मामला- ज्वैलरी फर्म से 1.5 करोड़ की ठगी
ठीक इसी तरह का दूसरा मामला एक लग्जरी गोल्ड ज्वैलरी डिजाइनिंग फर्म में सामने आया, जहां ठगों ने 1.5 करोड़ रुपये उड़ा दिए। यहां ठग ने कंपनी के एक जूनियर अकाउंटेंट को निशाना बनाया और उसे भी वही वायरस वाली जिप फाइल भेजी। फाइल खुलते ही ठग ने जूनियर अकाउंटेंट के फोन को हैक किया, कंपनी के डायरेक्टर का नंबर ब्लॉक किया और अपना नंबर 'डायरेक्टर' के नाम से सेव कर लिया।
इसके बाद ठग ने व्हाट्सएप पर डायरेक्टर बनकर जूनियर अकाउंटेंट को गाजियाबाद के एक कपड़ा व्यापारी के खाते में 1.5 करोड़ रुपये भेजने को कहा। जूनियर अकाउंटेंट ने अपने सीनियर अकाउंटेंट से सलाह ली और दोनों ने सोचा कि आदेश सीधे मालिक की तरफ से आया है। उन्होंने 12 से 16 जून के बीच सारे पैसे ट्रांसफर कर दिए।
एक्सपर्ट की चेतावनी- लैपटॉप-कंप्यूटर भी हो सकते हैं हैक
गौरतलब है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ निखिल महादेश्वर, जो इन वायरस फाइलों की जांच में पुलिस की मदद कर रहे हैं, उन्होंने चेतावनी दी है कि ये खतरनाक फाइलें सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि दफ्तरों के कंप्यूटर और लैपटॉप को भी हैक कर सकती हैं, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है। कंपनियों को अपने सिस्टम में मजबूत सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए।
साइबर पुलिस के डीसीपी बजरंग बंसोड ने हाल ही में व्यापारिक घरानों और कंपनियों के लिए एक जागरूकता सेशन भी रखा, ताकि लोगों को इस 'इम्पर्सनेशन स्कैम' से बचाया जा सके।