हर साल एक ही कहानी... मुंबई के लोगों के लिए आफत क्यों बन जाता है मानसून?
मुंबई में हर साल मानसून आफत बनकर आता है, जिससे जलभराव, पेड़ गिरने और खुले मैनहोल जैसी समस्याएं जानलेवा साबित होती हैं। ...और पढ़ें

बारिश में पानी-पानी हुई मुंबई। (पीटीआई)
HighLights
मुंबई में मानसून हर साल लाता है जानलेवा समस्याएं।
चेंबूर, साकीनाका में पेड़ गिरने, मैनहोल से हुई मौतें।
पिछले वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं मुंबई की वार्षिक चुनौती।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'भाई यह तो हर का साल का है, अंधेरी सबवे तो बंद होगा ही' मुंबई के लोग मौसम की पहली जोरदार बारिश होने पर भी ज्यादा परेशान नहीं होते।
सोशल मीडिया पर सड़कों पर पानी भरने, यात्रियों के फंसने और लोकल ट्रोनों के देर से चलने के बारे में मीम्स की बाढ़ आ जाती है। ऑफिस वॉट्सऐप ग्रुप्स में वर्क फ्रॉम होम के विकल्पों पर चर्चा शुरू हो जाती है। नेविगेशन ऐप्स पर सड़कें लाल दिखने लगती हैं। लेकिन इस मजाक के पीछे एक परेशान करने वाली सच्चाई भी है।
बारिश में पानी-पानी हुई मुंबई
कहते हैं कि अगर आप घर पर हैं तो बारिश मजा है, लेकिन अगर सड़क पर हैं तो सजा... मुंबईकरों को ये सजा हर साल भुगतनी पड़ती है। मुंबई के लिएस मानसून की पहली जोरदार बारिश सिर्फ मौसम की घटना नहीं है, यह धीरे-धीरे शहर की तैयारियों की सालाना परीक्षा बन गई है।
लगभग हर साल, बारिश के पहले जोरदार दौर के साथ ही सड़कों और गाड़ियों पर पेड़ गिरने, दीवारें और बालकनियां ढहने, बिलजी का झटका लगने का खतरा, खुले मैनहोल, सबवे में पानी भरना और दुखद रूप से लोगों की जान जाने की खबरें आती हैं। इस साल भी कुछ अलग नहीं हुआ।
पहली जोरदार बारिश और मौत
मौसम की पहली व्यापक जोरदार बारिश के कुछ ही दिनों के भीतर, मुंबई में बारिश से जुड़ी कई दुखद घटनाएं हुईं। चेम्बूर में पेड़ गिरने से 11 साल के एक लड़के की मौत हो गई, जिससे इस बात पर गुस्सा फैल गया कि क्या मानसून से पहले उस पेड़ को खतरनाक के तौर पर पहचाना गया था।
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बाद में BMC ने घटना की जांच पूरी होने तक एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया।
साकीनाका में एक और दुखद घटना हुई, जहां 55 साल का एक व्यक्ति बारिश के पानी में छिपे खुले मैनहोल में गिर गया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद नगर निकाय ने लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया।
सांताक्रूज में, नगर निकाय के अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान अचानक पेड़ गिरने से आठ लोग घायल हो गए। इससे भारी बारिश के दौरान पुराने शहरी पेड़ों से होने वाले खतरे और अनिश्चितता का पता चलता है।
आंकड़े के जरिए मुंबई में बारिश की कहानी
भारी बारिश के शुरुआती कुछ दिनों में बड़ी संख्या में इमरजेंसी कॉल आए। नगर निकाय के कंट्रोल रूम शहर और उपनगरों में इमरजेंसी स्थितियों से निपटने में व्यस्त रहे।
2025
2025 के मानसून में भी बारिश से जुड़ी दुखद घटनाएं देखने को मिलीं। BKC मेट्रो स्टेशन के पास बारिश के पानी से भरे गड्ढे में गिरने से 13 साल के एक लड़के की मौत हो गई और विक्रोली (पूर्व) के कन्नमवार नगर में रहने वाले 25 साल के तेजस नायडू की भारी बारिश के दौरान पेड़ गिरने से मौत हो गई।
सिर्फ 2025 में, BMC को दो महीनों में गड्ढों के बारे में 7,083 शिकायतें मिलीं, जिनमें से लगभग 40% शिकायतें तीन वार्डों से थीं। इस मौसम में पवई में पानी से भरे गड्ढे में स्कूटर के गिरने से भी एक जानलेवा हादसा हुआ।
2024
9 जून 2024 को मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने के बाद, BMC ने 9 जून से 22 जून के बीच पेड़ उखड़ने और टहनियां गिरने की 106 शिकायतें दर्ज कीं।
2023
2023 का मॉनसून और भी ज्यादा जानलेवा साबित हुआ। आंकड़ों के मुताबिक, मानसून शुरू होने के बाद मुंबई में 450 से ज्यादा पेड़ गिर गए और 29 जून से 12 जुलाई के बीच पेड़ या टहनियां गिरने से दबकर चार लोगों की मौत हो गई।