'टोल वसूलने के बावजूद खराब सड़क देना सेवा में कमी', NHAI को उपभोक्ता आयोग की फटकार; ड्राइवर को मिलेगा मुआवजा
नागपुर उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि खराब सड़कों के लिए टोल वसूलना 'सेवा में कमी' है। ...और पढ़ें

(यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

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डिजिटल डेस्क, नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर के उपभोक्ता आयोग ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपने आदेश में आयोग ने कहा कि खराब तरीके से बनाई गई सड़कों के लिए टोल टैक्स वसूलना 'सेवा में कमी' माना जाएगा। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, कमीशन ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि वह उस ड्राइवर को मुआवजा दे जिसकी गाड़ी गड्ढों की वजह से खराब हो गई थी।
इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में, जिला कंज्यूमर विवाद निवारण आयोग, नागपुर ने कहा कि 'टोल टैक्स लेकर सुरक्षित और गाड़ी चलाने लायक सड़क उपलब्ध कराना टोल वसूलने वाली कंपनी/अथॉरिटी की जिम्मेदारी है।' आयोग ने आगे कहा, 'टोल वसूलना और खराब सड़क देना सेवा में कमी है।'
क्या था पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, ड्राइवर 2 अक्टूबर, 2020 को तय टोल टैक्स चुकाकर महाराष्ट्र के नागपुर से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जा रहा था, तभी उसकी कार नेशनल हाईवे पर एक गड्ढे में जा गिरी। उसने आरोप लगाया कि इस टक्कर से गाड़ी का स्टील व्हील रिम बुरी तरह नष्ट हो गया और टायर निकल गया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने बाकी का सफर स्पेयर टायर का इस्तेमाल करके पूरा किया और गाड़ी ठीक कराने के लिए उसे एक दिन और रुकना पड़ा। उसने यह भी आरोप लगाया कि वापसी के सफर के दौरान टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने शिकायत रजिस्टर करने से इनकार कर दिया और कहा कि इंचार्ज अधिकारी मौजूद नहीं है। हालांकि बाद में उसने मरम्मत के खर्च की भरपाई के लिए हाईवे अथॉरिटी को नोटिस भेजा, लेकिन उसका दावा है कि कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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कंज्यूमर कमीशन में की शिकायत
इसके बाद, व्यक्ति ने कंज्यूमर कमीशन से संपर्क किया और NHAI पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए हुए नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग की। अपने लिखित जवाब में, NHAI की छिंदवाड़ा यूनिट ने सड़क पर गड्ढे होने की बात मानी और इसके लिए भारी बारिश और ज्यादा ट्रैफ़िक को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही कहा कि घटना के समय मरम्मत का काम चल रहा था। शिकायतकर्ता को हुई परेशानी पर अफसोस जताते हुए, अथॉरिटी ने कमीशन से केस खारिज करने की अपील की।
उनका कहना था कि ड्राइवर यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे पाया कि गाड़ी की रेगुलर मेंटेनेंस की गई थी। NHAI के तर्क को खारिज करते हुए, कमीशन ने कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत किसी कंज्यूमर के लिए गाड़ी की रेगुलर मेंटेनेंस का रिकॉर्ड दिखाना जरूरी नहीं है। कमीशन ने कहा कि यह साबित करना ही काफी है कि नुकसान सीधे तौर पर गड्ढों की वजह से हुआ था, ताकि शिकायत को सही ठहराया जा सके।
ड्राइवर को मुआवजे का एलान
कमीशन ने फैसला सुनाया, 'चूंकि टोल कलेक्शन और सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी दूसरी पार्टी की है, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर तय होती है।' कमीशन ने यूनिट को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को गाड़ी की मरम्मत और टोल के पैसे वापस करने के लिए 1,030 रुपये, मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करे। कमीशन ने NHAI को 45 दिनों के भीतर मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया है।