14 साल से फेल हो रहे MBBS स्टूडेंट को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने मरीजों की सुरक्षा का दिया हवाला, टूटा डॉक्टर बनने का सपना
14 वर्षों में भी MBBS पूरा न पर पाने छात्र को अब राजस्थान हाई कोर्ट ने और मौके देने से मना कर दिया है। इस केस की सुनवाई जस्टिस अरुण मोंगा की बेंच द्वा ...और पढ़ें

MBBS student परीक्षा में 14 वर्ष से हो रहा फेल।
HighLights
कोर्ट ने 14 साल से फेल हो रहे छात्र की याचिका की खारिज।
जस्टिस अरुण मोंगा की बेंच ने की सुनवाई।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान में MBBS स्टूडेंट्स का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) यूनिवर्सिटी जयपुर में वर्ष 2010 से के छात्र डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है। लेकिन, स्टूडेंट वर्ष 2024 तक यानी कि 10 वर्षों के बाद भी परीक्षा को पास नहीं कर सका जिसके बाद अब राजस्थान हाई कोर्ट ने आगे की पढ़ाई करने पर रोक लगा दी है।
अंतिम मौका मिलने के बाद भी हो गया फेल
इससे पहले एक सुनवाई के आदेश के बाद छात्र को 30 जनवरी 2024 को एक अंतिम मौका परीक्षा पास करने के लिए दिया गया था। लेकिन, वो इस बार भी फेल हो गया। उसकी कॉपी को सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश किया गया था।
कोर्ट ने मरीजों की सुरक्षा का दिया हवाला
अब सुनवाई के बाद राजस्थान हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि मेडिकल शिक्षा सीधे मरीजों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ी है, इसलिए इसमें नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता। केवल सहानुभूति या आर्थिक नुकसान के आधार पर किसी छात्र को डॉक्टर बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जस्टिस अरुण मोंगा की बेंच ने छात्र के वकील शेख तारिक की अपील खारिज कर दी है जिसमें मांग की गई थी कि छात्र को अपने बचे हुए एग्जाम में बैठने की इजाजत दी जाए।
कोर्ट का बयान
राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सहानुभूति या आर्थिक नुकसान के आधार पर किसी को डॉक्टर नहीं बनाया जा सकता। मेडिकल डिग्री ऐसे व्यक्ति को ही मिलनी चाहिए, जिसने निर्धारित शैक्षणिक मानकों को पूरा किया हो। डॉक्टर का पेशा सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा होता है। ऐसे में शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता करना सार्वजनिक हित के खिलाफ होगा।