Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    46 साल पहले SLV-3 ने की थी प्राइवेट स्पेस यात्रा, अब स्काईरूट के विक्रम-1 ने की नए अध्याय की शुरुआत

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 12:20 PM (IST)

    स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1, भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट श्रीहरिकोटा से उड़ान भर ली है। इसने 46 साल पहले SLV-3 के लॉन्च स्थल से अंतरिक्ष इतिहास ...और पढ़ें

    HighLights

    1. स्काईरूट का विक्रम-1 भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट।

    2. श्रीहरिकोटा से 46 साल बाद SLV-3 के लॉन्च स्थल से उड़ान।

    3. यह मिशन निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम।

    डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। 46 साल पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत के पहले एक्सपेरिमेंटल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल SLV-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च करके अंतरिक्ष में जाने वाले देशों के खास ग्रुप में जगह बनाई थी। ठीक 46 साल बाद शनिवार को उसी स्पेसपोर्ट से देश के लॉन्च इतिहास का एक नया अध्याय शुरू हो गया है।

    भारत का पहला प्राइवेट तौर पर बनाया गया ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 ने सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा रेंज के पहले लॉन्च पैड से दोपहर 12:05 बजे उड़ान भरी।

    क्यों खास है आज की तारीख?

    आगमन नाम के इस मिशन पर देश और दुनिया सबकी नजरें हैं। न सिर्फ इसलिए कि यह स्काईरूट की पहली ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट है बल्कि इसलिए भी क्योंकि इसकी तारीख भारत के अंतरिक्ष इतिहास की एक बहुत अहम घटना से जुड़ी है।

    Sanae Playing Santoor (29)

    18 जुलाई 1980 को इसरो ने श्रीहरिकोटा से सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-3 (SLV-3E2) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था और रोहिणी सैटेलाइट आरएस-1 को ऑर्बिट में पहुंचाया था। 22 मीटर लंबा, 17 टन वजन, पूरी तरह सॉलिड फ्यूल वाला और चार स्टेज वाला यह एक्सपेरिमेंटल व्हीकल लो अर्थ ऑर्बिट में 40 किलोग्राम तक के पेलोड पहुंचा सकता था।

    इसकी सफलता के साथ ही भारत अपने दम पर सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता वाला छठा देश बन गया। एसएलवी-3 की तरह 22 मीटर लंबा विक्रम-1 46 साल बाद इसरो के लॉन्चपैड लॉन्च हुआ। यह भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट है जो इस मुकाम तक पहुंचा है।

    खबरें और भी

    स्काईरूट के सीईओ ने क्या कहा?

    स्काईरूट एयरोस्पेस के को-फाउंडर और सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा, "यह पहली बार है जब कोई प्राइवेट रॉकेट इसरो के लॉन्चपैड पर खड़ा है।" उन्होंने इस पल की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि यह कंपनी और भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम है।

    क्या है टारगेट?

    विक्रम-1 सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा और मल्टी-स्टेज लॉन्च व्हीकल है, जिसे पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है। इसे इन-हाउस विकसित प्रोपल्शन सिस्टम से पावर मिलती है, जिसमें हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल बूस्टर और 3D-प्रिंटेड इंजन शामिल हैं।

    इसे 350 किलोग्राम तक वजन वाले सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। पहली टेस्ट फ्लाइट का लक्ष्य 60 डिग्री के झुकाव पर 450 किलोमीटर की कक्षा तक पहुंचना है।

    Sanae Playing Santoor (30)

    लॉन्च विंडो की घोषणा पहले 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच की गई थी लेकिन विक्रम-1 की पहली टेस्ट फ्लाइट की लॉन्चिंग आखिरकार शनिवार को तय की गई। अधिकारियों ने एयरस्पेस और समुद्री इलाकों के लिए नोटिस जारी किए और रॉकेट के ऊपर जाने और गिरने के रास्ते में प्रतिबंधित क्षेत्र बनाए।

    स्काईरूट के लॉन्च कंट्रोल सेंटर से आखिरी इंटीग्रेटेड जांच पूरी होने के बाद रॉकेट को लॉन्च किया गया। टेलीमेट्री ग्राउंड स्टेशनों और ट्रैकिंग रडार के साथ इंटरफेस की जांच भी की गई।

    Sanae Playing Santoor (31)

    स्काईरूट के लिए यह उड़ान कमर्शियल लॉन्च से ज्यादा टेक्नोलॉजी को परखने का मिशन है। कंपनी उन सिस्टम का फ्लाइट डेटा इकट्ठा करना चाहती है जिनका अब तक सिर्फ जमीन पर ही टेस्ट किया गया है।

    इस मिशन के लगभग 16 मिनट तक चलने की उम्मीद है लेकिन इससे मिलने वाली जानकारी विक्रम लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम के अगले चरण को आकार दे सकती है।

    यह भी पढ़ें: 'ऐतिहासिक नई शुरूआत', भारत के पहले निजी रॉकेट विक्रम-1 के लॉन्च से पहले पीएम मोदी ने स्काईरूट की टीम को दी बधाई