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    एंजियोप्लास्टी के दौरान इंजेक्शन लगते ही जमने लगा थक्का, डॉक्टरों के फूले हाथ पांव; अब होगी जांच

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 02:08 AM (IST)

    छत्तीसगढ़ के आंबेडकर अस्पताल में एंजियोप्लास्टी के दौरान हेपरिन इंजेक्शन लगाते ही मरीज की कोरोनरी धमनियों में खून के थक्के बनने लगे, जबकि एंजियोप्लास् ...और पढ़ें

    एंजियोप्लास्टी के दौरान इंजेक्शन लगते ही जमने लगा थक्का (सांकेतिक तस्वीर)

    एंजियोप्लास्टी के दौरान इंजेक्शन लगते ही जमने लगा थक्का (सांकेतिक तस्वीर)

    HighLights

    1. दो वॉयल चढ़ाने के बाद बनने लगे खून के थक्के, एंजियोप्लास्टी से पहले स्थिति थी सामान्य 

    2. कार्डियोलाजी विभाग की चेतावनी के बाद अस्पताल ने सीजीएमएससी को लिखा पत्र

    जेएनएन, रायपुर। छत्तीसगढ़ के आंबेडकर अस्पताल में एंजियोप्लास्टी के दौरान हेपरिन इंजेक्शन लगाते ही मरीज की कोरोनरी धमनियों में खून के थक्के बनने लगे, जबकि एंजियोप्लास्टी शुरू होने से पहले ऐसी स्थिति बिल्कुल सामान्य थी।

    कार्डियोलाजी विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को अवगत कराया है कि इंजेक्शन की दो अलग-अलग वॉयल से कुल 18 हजार आइयू दवा देने के बाद भी खून का थक्का जमने की स्थिति पैदा हुई। विभाग ने इसे मरीज के जीवन के लिए गंभीर खतरा बताया और तत्काल जांच व कार्रवाई की मांग की।

    इसके बाद विभाग अधीक्षक स्मित श्रीवास्तव ने मामले को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) को पत्र भेजकर संबंधित बैच के सभी हेपरिन इंजेक्शन तत्काल वापस लेने तथा उनके स्थान पर गुणवत्तायुक्त दवा उपलब्ध कराने को कहा है।

    10 जुलाई 2026 को 56 वर्षीय मीना बाई रात्रे की एंजियोप्लास्टी की जा रही थी। प्रक्रिया के दौरान सीजीएमएससी से आपूर्ति किए गए हेपरिन इंजेक्शन के बैच आइएचईपीबी-1555 की दो अलग-अलग वायल का उपयोग किया गया।

    कार्डियोलाजी विभाग के अनुसार, निर्धारित मात्रा देने के बावजूद मरीज की कोरोनरी धमनियों में खून के थक्के बनने लगे। डॉक्टरों ने आपातकाल स्थिति को देख जल्द ही दूसरी दवा से स्थिति को सामान्य किया।

    कार्डियोलाजी विभाग का पत्र मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने 16 जुलाई को सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक को पत्र भेजा। इसमें विभागाध्यक्ष के पत्र का हवाला देते हुए संबंधित बैच के हेपरिन इंजेक्शन तत्काल वापस लेने को कहा गया।

    गुणवत्ता पर सवाल, जांच से तय होगी वजह
    विशेषज्ञों के अनुसार, हेपरिन एंजियोप्लास्टी के दौरान रक्त का थक्का बनने से रोकने वाली महत्वपूर्ण दवा है। यदि इसके प्रभाव को लेकर संदेह पैदा होता है तो यह केवल एक मरीज का नहीं, बल्कि उसी बैच से उपचार पाने वाले अन्य मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय भी बन जाता है।

    सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रीतेश अग्रवाल ने कहा कि संबंधित बैच की गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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